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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   HP High Court: govt summons status report in two weeks on the uproar of tourists in Manikarna

HP High Court: मणिकर्ण में पर्यटकों के हंगामे पर सरकार से दो हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट तलब

Mon, 10 Apr 2023 07:09 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 10 Apr 2023 07:09 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने धार्मिक पर्यटन नगरी मणिकर्ण में पर्यटकों के हंगामे पर ताजा स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने सरकार को रिपोर्ट दायर करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है।

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विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने धार्मिक पर्यटन नगरी मणिकर्ण में पर्यटकों के हंगामे पर ताजा स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने सरकार को रिपोर्ट दायर करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद निर्धारित की गई है। पिछली रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार ने संवेदनशील जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है। हातीथान-भुंतर और सुमा रोपा में 24x7 नाकाबंदी के आदेश दिए गए है।
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इसके अलावा अदालत को बताया गया कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया गया है। मणिकर्ण आने वाले सभी वाहनों की तलाशी ली जा रही है। शांति बनाए रखने के लिए आधी बटालियन के जवानों को तैनात किया गया है। पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और डीएसपी कुल्लू को निगरानी के लिए तैनात किया गया है। सरकार ने मणिकर्ण और कसोल में हुड़दंगियों से निपटने के लिए अदालत के समक्ष सुझाव भी पेश किए हैं। मणिकर्ण में कम से कम 40 पुलिस अधिकारियों के साथ पुलिस थाना खोलने की मांग की गई है।
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बता दें कि हाईकोर्ट ने दैनिक समाचार पत्र में छपी खबरों पर स्वत: संज्ञान लिया है। छह मार्च 2023 को खबर प्रकाशित हुई थी कि पंजाब के पर्यटकों ने मनाली के ग्रीन टैक्स बैरियर पर हंगामा किया। ग्रीन टैक्स नहीं देने पर सैलानी मजदूरों से उलझ गए और देखते ही देखते करीब 100 मोटरसाइकिल सवार सड़क पर जमा हो गए। हुड़दंगबाजों ने नारेबाजी से माहौल तनावपूर्ण बना दिया। सात मार्च 2023 को प्रकाशित खबर के अनुसार पंजाब के पर्यटकों ने मणिकर्ण में भी उत्पात मचाया। छह मार्च की रात को मणिकर्ण में दंगे जैसी स्थिति देखी गई। हुड़दंगियों ने बीयर की बोतलें नयनादेवी माता मंदिर की ओर सड़क पर फेंक दी। उपद्रवियों ने मंदिरों, घरों और 20 वाहनों में लोहे की छड़ों और लाठियों से तोड़फोड़ की। अदालत ने इन घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को मामले में स्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए थे।
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अटल टनल के पास गंदगी के मामले में मुख्य सचिव से जवाब तलब

अटल टनल के आसपास कचरे के ढेरों पर हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है। अदालत ने मुख्य सचिव से गंदगी रोकने के लिए बनाए गए प्रावधानों की जानकारी तलब की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई अब 15 मई निर्धारित की है। मामले पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत से ताजा शपथपत्र दायर करने का आग्रह किया। अदालत ने गंदगी को हटाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश दिए थे।

कोर्ट ने गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगाने वाले नियम और पिछले एक वर्ष में वसूल किए गए जुर्माने की रकम की जानकारी भी मांगी थी। अटल टनल के आसपास गंदगी को रोकने के लिए बनाए गए अथवा बनाए जाने वाले प्रावधानों की जानकारी भी मांगी गई थी। इनमें चेतावनी बोर्ड, डस्टबिन, पुरुषों और महिलाओं के लिए शौचालय और क्षेत्र को साफ सुथरा बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे उपाय शामिल है। बता दें कि अटल टनल एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल के रूप में उभरा है और बड़ी तादाद में पर्यटक लाहौल की खूबसूरत वादियों में घूमने आते हैं।

पर्यटकों की ओर से अटल टनल के आसपास कचरा फैलाया जा रहा है। यहां न तो पर्याप्त कूड़ेदान है और न ही पुरुषों और महिलाओं के लिए पर्याप्त शौचालय हैं। यह टनल हिमालय की पीर पंजाल श्रृंखला के उत्तरी क्षेत्र में रोहतांग दर्रे के नीचे बनाई गई है। 3,200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस टनल का लोकार्पण 3 अक्तूबर, 2020 को किया गया था। रक्षा मंत्रालय के तहत बीआरओ ने इसका कार्य पूरा किया था।

जंगी-थोपन पोवारी प्रोजेक्ट मामले की सुनवाई 2 मई को

 हाईकोर्ट में लंबित जंगी-थोपन मामले की सुनवाई 2 मई को निर्धारित की गई है। राज्य सरकार की गुहार पर अदालत ने अदाणी समूह और राज्य सरकार की दोनों अपीलों की सुनवाई एक साथ निर्धारित की है। किन्नौर जिले की जंगी-थोपन-पोवारी जल विद्युत परियोजना शुरू से ही विवादों में रही है। विदेशी कंपनी ब्रेकल के बाद अदाणी समूह भी इस परियोजना को नहीं बनाना चाहता है। 960 मेगावाट के महत्वपूर्ण हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को ब्रेकल को वर्ष 2007 में आवंटित किया गया। कंपनी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया और अपफ्रंट राशि जमा नहीं करवाई। इसके बाद यह प्रोजेक्ट अदाणी कंपनी को दिया गया। समूह ने प्रीमियम के तौर पर 280.06 करोड़ जमा किए।

बाद में इस परियोजना के टेंडर को रद्द कर दिया गया। ब्रेकल कंपनी ने हिमाचल सरकार से पत्राचार किया और अगस्त 2013 को अदाणी समूह के पार्टनर के तौर पर 280.06 करोड़ को ब्याज सहित वापस करने के लिए आग्रह किया। अक्तूबर 2017 में कैबिनेट मीटिंग में वीरभद्र सिंह सरकार ने फैसला लिया था कि अदाणी समूह को पावर प्रोजेक्ट की 280 करोड़ की अपफ्रंट मनी वापस की जाएगी, लेकिन 5 दिसंबर, 2017 को सरकार ने अदानी ग्रुप पर दिखाई गई 280 करोड़ रुपये की मेहरबानी वाला फैसला वापस ले लिया।

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