तबादला करने में तो चुस्त है सरकार, पर कार्रवाई में है सुस्त: हाईकोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने प्रदेश में सक्रिय खनन माफिया के खिलाफ उचित कार्रवाई न करने पर गृह सचिव और उद्योग विभाग के निदेशक को तलब किया है। कोर्ट ने मामले की पैरवी करने वाले कोर्ट मित्र और महाधिवक्ता से आग्रह किया कि वह कोई सुझाव दे, ताकि प्रदेश में अवैध खनन पर काबू पाया जा सके।
कोर्ट ने खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई में बरती जा रही लापरवाही पर सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह सेकेंडों में कार्यवाई करने वाले अधिकारियों का तबादला तो कर देती है, लेकिन अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कार्यवाई में ढीली रहती है।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने प्रदेश में खनन माफियाओं की बढ़ती सक्रियता पर छपी खबरों पर संज्ञान लेते हुए यह आदेश पारित किए।
एएसपी के तबादले में नहीं बरती पारदर्शिता
मामले की सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि एएसपी गौरव सिंह को बद्दी से धर्मशाला स्थानांतरित करने में कोई पारदर्शिता नहीं बरती। सरकार ने कुछ दस्तावेज अपनी रिपोर्ट के साथ लगाए।
लेकिन ऐसी कोई भी नोटिंग पेश नहीं की, जिससे इस अफसर को स्थानांतरित करने के पीछे के कारण स्पष्ट हो सके। सरकार ने हाईकोर्ट को शपथपत्र के माध्यम से बताया था कि उन्हें बड़ी जिम्मेवारी देते हुए बद्दी से धर्मशाला भेजा गया।
सरकार ने दिया था ये तर्क
सरकार ने कहा था कि बद्दी की अपेक्षा कांगड़ा में कानून व्यवस्था काफी चुनौतीपूर्ण है। एएसपी गौरव सिंह को बड़ा रैंक और बड़ी जिम्मेवारी दी गई है। कोर्ट ने इस मामले में उद्योग विभाग के सचिव और निदेशक स्टेट जियोलॉजिस्ट, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित सभी जिलों के जिलाधीश व पुलिस अधीक्षकों को पार्टी बनाते हुए इनसे 21 सितंबर तक खनन बारे स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।