जमाखोरी के खिलाफ हिमाचल ने अपनाया ये फॉर्मूला?
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हिमाचल सरकार ने भी केंद्र के फैसले के बाद सूबे में जमाखोरों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। नई अधिसूचना के अनुसार अब कोई भी थोक विक्रेता अपने पास 10 क्विंटल तथा फुटकर विक्रेता 2 क्विंटल प्याज का ही भंडारण कर पाएगा।
आलू के लिए थोक विक्रेता 20 क्विंटल और फुटकर विक्रेता 4 क्विंटल का भंडारण कर सकता है। प्रदेश में खाद्यान्न (दाल, तेल, चीनी, नमक) भंडारण की मौजूदा लिमिट को अब घटा कर 50 प्रतिशत किया जा रहा है ताकि जमाखोरी न हो।
जमाखोरी पर होगी कार्रवाई: बाली
दिल्ली से लौटे खाद्य आपूर्ति एवं परिवहन मंत्री जीएस बाली ने शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग जमाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा।
बाली ने कहा कि कालाबाजारियों और जमाखोरों पर नियंत्रण रखने के लिए आलू और प्याज की सप्लाई चेन को सुचारु रखना जरूरी है।
भारत सरकार के खाद्य, वित्त तथा कृषि मंत्री के साथ हुई सभी राज्यों के खाद्य मंत्रियों की बैठक में सहमति बनी है कि राज्यों में किसी भी स्तर पर खाद्यान्न की जमाखोरी और कालाबाजारी सहन नहीं की जाएगी।
दुकानों में रेट लिस्ट लगाना होगा अनिवार्य
प्रदेश की सभी फल सब्जी और किराने की दुकानों में अब दुकानदारों को आज के भाव की लिस्ट लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। जो नहीं लगाएगा उस पर कार्रवाई होगी। दुकानों के बाहर रेट लिस्ट लगाने के लिए चार दिन का वक्त दिया है। इसकी तीन माह के बाद समीक्षा की जाएगी।
दिल्ली में हुई खाद्य मंत्रियों की बैठक में आश्चर्य जताया गया कि हिमाचल में जमाखोरों के खिलाफ एक ही एफआईआर दर्ज की गई है। मंत्री ने प्रधान सचिव को निर्देश दिए हैं कि वह सभी जिला उपायुक्तों को नए फैसलों की जानकारी दें। सभी स्टॉक होल्डर अगले तीन दिन के भीतर अपने स्टाक की जानकारी संबंधित विभाग को दें।
दुकानदारों को 14 जुलाई तक अपना स्टॉक मैंटेन करने को कहा गया है। सोमवार से दुकानदारों को खाद्यान्न की लिमिट बनानी होगी। 50 फीसदी फिक्स लिमिट का मतलब दुकानदारों के पास वर्तमान में जो स्टाक है, वो उन्हें अब आधा रखना होगा।