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मनरेगा के कामगारों को सरकार ने दिया तोहफा
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 12 Sep 2014 03:00 PM IST
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प्रदेश सरकार ने मनरेगा के तहत काम करने वाले कामगारों को बड़ी राहत दी है। ठेकेदारों के पास काम करने वाले मजदूरों की तर्ज पर अब मनरेगा कामगारों को भी पंजीकृत कर कामगार कल्याण बोर्ड की विभिन्न योजनाओं का फायदा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में ये फैसला लिया गया है।
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बैठक में निर्णय लिया गया कि मनरेगा के तहत लगातार 90 दिनों तक कार्य करने वाले कामगार के नाम को पंचायत सचिव की ओर से सत्यापित किया जाएगा और संबंधित जिले के श्रम अधिकारी के माध्यम से सत्यापित कागजात बोर्ड को भेजे जाएंगे। उसके बाद उन्होंने बोर्ड की ओर से दी जाने वाली सभी सुविधाएं दी जाएंगी।
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कल्याण बोर्ड कामगारों को वॉशिंग मशीन, इंडक्शन, साइकिल और बच्चों की पढ़ाई के लिए पंद्रह हजार तक वजीफा देता है। यही नहीं खुद की मौत पर परिजनों को 50 हजार और दुर्घटना पर 1 लाख रुपये मुआवजा देने का प्रावधान है। सरकार ने उन मनरेगा कामगारों को यह सुविधा देने का फैसला लिया है जिन्होंने एक साल में कम से कम 90 दिन काम किया होगा। लाभ लेने वालों के लिए 18 से 60 साल के बीच उम्र होने की शर्त भी सरकार ने लगाई है।
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क्या होगा खास
•खाना पकाने के लिए इंडक्शन चूल्हा और बच्चों की पढ़ाई के लिए वजीफे का प्रावधान
•शादी के लिए 25 हजार रुपये की मदद भी करेगा कामगार कल्याण बोर्ड
•कामगारों को सिर्फ 10 रुपये देकर बोर्ड में करवाना होगा पंजीकरण
•लाभ लेने वालों के लिए 18 से 60 साल उम्र की शर्त लगाई सरकार ने
कैसे होगा पात्रों का चयन
प्रदेश में पौने 12 लाख मनरेगा कामगार हैं। इसमें बीते वर्ष 55 हजार परिवारों को 100 दिन का रोजगार दिया गया। योजना के तहत पात्र की उम्र 18 से 60 साल के बीच होनी चाहिए। प्रदेश में कम से कम 25 हजार कामगारों को लाभ मिलेगा।
कल्याण बोर्ड बजट के हिसाब से पंजीकृत कामगारों को सीनियोरिटी के तहत सुविधाएं देगा। पंजीकरण शुल्क 10 रुपये है। ये लाभ उन्हीं मनरेगा कामगारों को मिलेगा जो सड़क या रास्ते के निर्माण में लगे हों। बोर्ड की ओर से पंजीकृत मजदूरों को पहले ही इस योजना से लाभ मिल रहा है।