आउटसोर्स कर्मियों का विधानसभा के बाहर प्रदर्शन, सरकार ने दिया ये जवाब
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हिमाचल के हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों ने मंगलवार को विधानसभा का घेराव किया। इस दौरान हजारों कर्मचारियों ने नारेबाजी की और सरकार से उन्हें नियमित करने की मांग की।
लेकिन इन सबके बीच को इन कर्मियों को नियमित करने को लेकर भले ही सरकार आश्वासन देती हो लेकिन आधिकारिक रूप से वह मौन है। विधानसभा में भाजपा विधायक जय राम ठाकुर और विनोद कुमार द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने के लिए नीति बनाने के संबंध में पूछे गए सवाल पर सरकार गोलमोल जवाब देती दिखी।
नियमित करने के लिए नीति बनाने के सवाल पर सरकार ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा शर्तों के संरक्षण के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि उसने यह जवाब नहीं दिया कि वह इन्हें नियमित करना चाहती है या नहीं।
यह तब है जब खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व उनके बेटे व युवा कांग्रेस अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह आउटसोर्स कर्मचारियों को रेगुलर करने के लिए प्रयासरत होने का आश्वासन दे रहे हैं। सरकार की ओर से विधानसभा में आए इस जवाब से साफ है कि सरकार ने उन्हें रेगुलर करने के संबंध में कुछ भी नहीं किया है।
सरकारी स्कूलों से घटा मोह, 207 प्राथमिक स्कूल हुए बंद
सरकारी स्कूलों के प्रति प्रदेश के लोगों का मोह लगातार घटता जा रहा है। सरकारी स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में आ रही गिरावट के चलते अभिभावकों ने सरकारी स्कूलों से बच्चों का निकालना शुरू कर दिया है। बीते पांच साल के दौरान 207 प्राथमिक स्कूलों में एक भी ऐडमिशन नहीं होने के चलते सरकार को इन स्कूलों को बंद करना पड़ा है।
इन बंद हुए स्कूलों में से 76 स्कूलों के भवन तो आज भी खाली पड़े हैं। शिक्षा विभाग इन भवनों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। मंगलवार को विधानसभा में सरकाघाट के विधायक इंद्र सिंह के सवाल के जवाब में सरकार ने लिखित में यह जवाब दिया।
उधर, कुल्लू से विधायक महेश्वर सिंह द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने लिखित में बताया कि 31 जुलाई तक जिला कुल्लू में कुल 91 पाठशालाओं का भवन निर्माण वन भूूमि पर हुआ है। भूमि को शिक्षा विभाग के नाम हस्तांतरित करने के लिए 16 मामले वन मंडल अधिकारी कुल्लू को भेजे गए हैं।
शेष 61 मामले विभाग द्वारा संबंधित ग्राम पंचायतों के समक्ष उठाए गए हैं। सभी मामले पंचायतों के स्तर पर ही विचाराधीन है। जैसे ही पंचायतों से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त होंगे, मामले वन मंडल अधिकारी कार्यालय को भेज दिए जाएंगे।