सरकार का फैसला, छात्रा को अकेले में नहीं बुला सकेंगे टीचर
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प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में अब अध्यापक छात्रा को अकेले में नहीं बुला सकेंगे। शिक्षकों को या तो क्लास रूम में सबसे सामने बात करनी होगी या फिर स्टॉफ रूम में बुलाने पर एक अन्य छात्रा साथ होनी चाहिए। अकेली छात्रा को अब ट्यूशन भी नहीं पढ़ा सकेंगे।
स्कूलों में लड़कियों के साथ बढ़ रहे छेड़खानी और यौन शोषण के मामलों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के छात्राओं को अकेले बुलाने पर रोक लगा दी है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने मंगलवार को सभी जिला उपनिदेशकों को आदेश जारी कर सभी सरकारी और निजी स्कूल में सिंगल स्टूडेंट को क्लास रूम और स्टॉफ रूम में बुलाने पर पाबंदी लगा दी है।
सरकार ने सरकारी शिक्षकों के निजी तौर पर ट्यूशन पढ़ाने पर लगाई गई रोक का भी सख्ती से पालन करने को कहा है। संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा सतीश शर्मा ने इसकी पुष्टि की है। बीते कुछ समय से स्कूलों में छात्राओं से छेड़खानी और यौन शोषण के मामले बढ़े हैं।
अकेले में बुलाकर छात्राओं का होता है यौन शोषण
शिक्षकों द्वारा छात्राओं को अकेले में बुलाकर धमकाया जाता है। उनकी लज्जा भंग करने का प्रयास किए जाते हैं। ट्यूशन के बहाने भी छात्र-छात्राओं को एकांत में बुलाया जाता है। नए आदेशों के तहत अब शिक्षक ने जो भी बात किसी विद्यार्थी से करनी है, वह पूरी कक्षा के सामने करनी होगी।
अगर किसी आवश्यक कार्य के लिए किसी विद्यार्थी को बुलाना ही है तो ऐसे हालात में दो विद्यार्थी एक साथ होने चाहिए। इस सूरत में भी विद्यार्थी सिर्फ स्टाफ रूम के बाहर तक ही जा सकेंगे।
राज्य महिला आयोग की सिफारिश पर संज्ञान
हिमाचल प्रदेश महिला आयोग ने प्रदेश सरकार से सिफारिश की थी कि शिक्षक अकेले में छात्रों को प्रताडि़त कर रहे हैं, इस पर रोक लगनी चाहिए। आयोग की सिफारिशों पर उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में नई व्यवस्था करने का फैसला लिया है।
महिला आयोग का कहना है कि स्कूलों में विशेषकर छात्राओं के यौन शोषण के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में आयोग ने सिफारिश करते हुए कहा है कि भविष्य में कोई भी शिक्षक किसी भी छात्र या छात्रा को अकेले में ना बुलाए।