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पीटीए शिक्षकों, अनुबंध कर्मियों को कैबिनेट में बड़ी राहत देने की तैयारी

Tue, 24 Apr 2018 11:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Tue, 24 Apr 2018 11:33 AM IST
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hp govt in planning to regularise the services of PTA teachers and contract employees

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में तैनात 7500 से अधिक पीटीए शिक्षकों को सरकार बड़ी राहत देने की तैयारी में है। दिल्ली में वकीलों से मामला स्पष्ट होते ही मामला कैबिनेट में लाने की तैयारी है। संभावित है कि 26 अप्रैल को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस बाबत प्रस्ताव आएगा। बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता पंकज कुमार ने केस वापस ले लिया है।

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ऐसे में क्या शिक्षा विभाग पीटीए शिक्षकों को नियमित कर सकता है या नहीं? इसको लेकर प्रदेश के विधि विभाग से राय मांगी गई थी। विधि विभाग ने कहा है कि एक व्यक्ति ने केस वापस लिया है। कुछ अन्य लोगों द्वारा किए गए केस अभी भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से नियमित किए जाने को लेकर राय लेना जरूरी है।
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विधि विभाग के इस कमेंट के बाद अब शिक्षा विभाग के अफसर सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से संपर्क करने में जुट गए हैं। दिल्ली से स्पष्टीकरण आते ही मामले पर कैबिनेट में चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी इस मामले को लेकर गंभीर हैं। बीते सप्ताह मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ इस संदर्भ में लंबी चर्चा की है।

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यह है मामला

hp govt in planning to regularise the services of PTA teachers and contract employees

अस्थायी शिक्षकों का यह मामला साल 2015 से सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्रार बेंच में चला हुआ था। बीते साल नवंबर में इसे डबल बेंच के लिए शिफ्ट किया गया। 5 जनवरी से इस मामले की सुनवाई शुरू हुई। याचिकाकर्ता पंकज कुमार ने साल 2013 में इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

आरोप लगाया था कि चहेतों को नौकरी दी गई जबकि पात्र शिक्षक बाहर कर दिए गए। हिमाचल हाईकोर्ट ने 2014 में अस्थायी शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। सरकार ने इसके बाद इनके लिए पॉलिसी तैयार कर दी थी। प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही करीब 5500 पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाया गया।

इसी दौरान हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीमकोेर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीमकोर्ट ने राज्य हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगाते हुए यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए। इसके बाद से यह मामला सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है। करीब 2000 पीटीए शिक्षक अनुबंध पर आने से छूट गए हैं।

अनुबंध कर्मियों के नियमितीकरण पर लगेगी मुहर

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तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने का मामला 26 अप्रैल को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में आ सकता है। सैकड़ों अनुबंध कर्मचारी एक अप्रैल से नियमित होने का इंतजार कर रहे हैं। कैबिनेट में मंजूरी के बाद जारी होने वाली अधिसूचना की तिथि से उनको नियमितीकरण के लाभ मिलेंगे।

इसके अलावा सरकार हाइड्रो प्रोजेक्ट को राहत देने के लिए ऊर्जा नीति के सरलीकरण पर चर्चा होगी। कई विभागों में रिक्त पदों को भरने के लिए मंत्रिमंडल भर्ती की मंजूरी दे सकता है। अनुबंध पर तैनात होने वाले कर्मचारियों को तीन वर्ष की सेवाओं के बाद सरकार नियमित करती है।

साल में दो बार एक अप्रैल और एक अक्तूबर नियमितीकरण की प्रक्रिया के लिए तिथियां तय की गई हैं। इस दौरान अपना तय कार्यक्रम पूरा करने वाले कर्मियों को लाभान्वित किया जाता है। इस बार निर्धारित तिथि गुजरने के बावजूद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, जिससे कर्मचारियों को नियमितीकरण के लाभ मिलने में एक माह का नुकसान हो चुका है। 

सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव वित्त विभाग की मंजूरी के लिए भेजा है। मंजूरी के बाद उसे कैबिनेट से पारित करवाया जाएगा। बैठक में ऊर्जा नीति के सरलीकरण का मामला भी आएगा। पिछली कैबिनेट बैठक में परामर्शी विभाग वित्त और विधि की सहमति के बिना आए प्रस्ताव को मुख्य सचिव ने लौटा दिया था।

सरकार जलविद्युत परियोजनाओं पर रॉयल्टी प्रावधानों पर शिथिलता लाने की तैयारी में है। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के साथ जंगी थोपन जैसे लटके आधा दर्जन बड़े हाइड्रो प्रोजेक्टों को नए सिरे से शुरू करने का प्रयास है। वन विभाग चीड़ की पत्तियों के दोहन और उनके व्यावसायिक उपयोग को लेकर भी कैबिनेट में नीतिगत प्रस्ताव ला सकता है।

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