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500 करोड़ का कर्ज लेगी हिमाचल सरकार, इसलिए लेना पड़ा फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 21 May 2017 01:31 PM IST
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आर्थिक संकट से जूझ रही प्रदेश सरकार 500 करोड़ का कर्ज लेने जा रही है। विकास कार्यों को संचालित करने के नाम पर यह कर्ज लेने की तैयारी है। सरकार ने दस वर्ष अवधि वाले अपने पांच सौ करोड़ के स्टॉक बेचने का निर्णय लिया है।
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वित्त विभाग ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर दी है। बीते वित्तीय वर्ष में भी सरकार ने साढ़े तीन हजार करोड़ का कर्ज लिया था, जबकि इस बार पहली तिमाही में ही पांच सौ करोड़ के स्टॉक बेचकर बाजार से पैसा लिया जाएगा।
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सरकार को ओर से जारी अधिसूचना में स्टॉक को भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से बेचा जाएगा। मुंबई में 23 मई को नीलामी होगी, जिसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र से अनुमति ले ली है। सरकार का अनुमान है कि पांच सौ करोड़ के स्टॉक पर इतना ही पैसा बाजार से मिल जाएगा, जिसकी अदायगी मई 2027 के बाद करनी होगी।
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वित्तीय संकट से जूझ रही सरकार के वार्षिक बजट प्लान का अधिकांश हिस्सा कर्मचारी वेतन और पेंशन में जाता है। ऐसे में विकास कार्यों के लिए सरकार को केंद्र पोषित योजनाओं या फिर कर्ज पर ही निर्भर होना पड़ता है। इसी वर्ष जनवरी 2017 से मार्च 2017 के बीच सरकार ने 24 सौ करोड़ का ऋण लिया था।
मौजूदा समय में सरकार पर कर्ज का बोझ 45 हजार करोड़ से अधिक जा पहुंचा है। प्रदेश सरकार के कई निगम और बोर्ड भी घाटे में चल रहे हैं, जिससे नॉन प्लान पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। सरकार ने नॉन प्लान का खर्च कम रखने के लिए जो अनुबंध पर नियुक्तियां देने की नीति बनाई थी, उसमें भी बदलाव किया गया है।
नियमित कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से सरकार पर आने वाले दिनों में आर्थिक बोझ और बढ़ेगा। इसके अलावा सरकार आउटसोर्सिंग से नियुक्त कर्मचारियों को नियमित करने की नीति पर काम कर रही है। अगर ऐसा हुआ तो सरकार पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा।