हड़ताल के चलते सरकारी ड्राइवरों ने संभाली 108 एंबुलेंस, छुट्टियां रद्द
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कंपनी कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद 108 और 102 एंबुलेंस चलाने के लिए प्रदेश सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था कर दी है। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत तमाम चालकों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें एंबुलेंस चलाने के आदेश दे दिए गए हैं।
स्वास्थ्य महकमे ने गृह रक्षा विभाग से भी अनुरोध किया है कि तमाम लाइसेंसधारी होमगार्डों को मदद के लिए भेजा जाए। वीरवार को भी कई सरकारी चालकों और होमगार्डों ने चार जिलों में 108 एंबुलेंस सेवा को संभाला। सूबे में 108 एंबुलेंस सेवा दे रही कंपनी जीवीके ने उत्तराखंड से भी चालक बुला लिए हैं।
उधर, प्रदेश सरकार की ओर एस्मा लगाने के बावजूद कंपनी के कर्मचारी वीरवार को चौथे दिन भी काम पर नहीं लौटे। मांगों को लेकर 108 एंबुलेंस सेवा कर्मचारियों ने शिमला में प्रदर्शन किया।
वैकल्पिक पायलटों को नहीं मिलीं चाबियां
हिमाचल के चार जिलों चंबा, सिरमौर, शिमला और सोलन में एंबुलेंस कर्मचारी पिछले चार दिनों से हड़ताल पर हैं। बीते दिन प्रदेश सरकार ने इन कर्मचारियों पर एस्मा लगा दिया है।
चारों जिलों के उपायुक्तों ने वीरवार को इस संबंध में एसपी, सीएमओ और होमगार्ड कमांडेंट के साथ बैठक की। हिमाचल के सिरमौर में वीरवार को भी 108 और 102 एंबुलेंस चालक हड़ताल पर रहे। वैकल्पिक तौर पर उत्तराखंड से पांच और स्थानीय होमगार्ड के दो चालक बुलाए थे।
शाम साढ़े पांच बजे तक इन वाहन पायलटों को एंबुलेंस की चाबियां नहीं सौंपी गईं। देर शाम तक चाबियां पहुंची। उत्तराखंड के देहरादून से प्रमोद प्रसाद, आशीष कुमार, विवेक मौर्य, कुमाऊं से पनी राम और विजय प्रसाद सुबह साढ़े नौ बजे सिविल अस्पताल पांवटा पहुंच गए।
108 एंबुलेंस कर्मियों की वेतन वृद्धि की मांग
108 एंबुलेंस सेवा कर्मचारियों ने मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और सरकार पर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। 108 और 102 कांट्रेक्ट वर्कर यूनियन के अध्यक्ष पूरन और महासचिव विजय कुमार का कहना है कि मानदेय, सालाना वेतन वृद्धि, आठ घंटे ड्यूटी टाइम सहित अन्य
मांगों को उठाया गया। सरकार ने हर बार आश्वासन ही दिया है। इसके अलावा 108 कर्मियों ने यह भी आरोप लगाए कि उनकी जगह जिन होमगार्ड के जवानों को गाड़ियों में रखा गया है कि वह तकनीकी रुप से सक्षम नहीं हैं।