हादसे रोकने के लिए सरकार का नया फॉर्मूला
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हिमाचल में सरकारी हों या निजी बसें, अब 10 वर्षों तक ही सड़क पर दौड़ेंगी। इसके बाद उन्हें रूट परमिट जारी नहीं किया जाएगा। प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए परिवहन विभाग ने अब नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के लिए बस रूट परमिट में यह कंडीशन जोड़ी जाएगी। मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान परिवहन मंत्री जीएस बाली ने बताया कि प्रदेश में बसों की उम्र को लेकर अभी तक कोई नियम नहीं है।
यही कारण है कि खस्ताहाल स्थिति में भी एचआरटीसी और प्राइवेट बसें सड़कों पर दौड़ाई जा रही हैं। इन बसों के दुर्घटनाग्रस्त होने से लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है। नई व्यवस्था जल्द लागू की जाएगी।
नई तकनीक से लैस होंगी सरकारी बसें
वहीं, एचआरटीसी की 2200 बसें छह माह में इंटेलिजेंट रोड ट्रांसपोर्ट सिस्टम से लैस होंगी। जीपीएस तकनीक पर आधारित इस सिस्टम से यात्रियों को रेलवे स्टेशन की तर्ज पर बस स्टैंड में लगी स्क्रीनों पर बसों से संबंधित सूचना मिलेगी।
एचआरटीसी प्रबंधन की भी बसों पर निरंतर नजर रहेगी। एचआरटीसी अभी तक वोल्वो बसों के अलावा, तारादेवी, बैजनाथ, पालमपुर और मंडी डिपो की बसों में इंटेलिजेंट रोड ट्रांसपोर्ट सिस्टम लगा चुका है।
निगम की सभी बसों को नई तकनीक से लैस करने पर 6 करोड़ 90 लाख रुपये खर्च आएगा।
बसों पर रहेगी निगरानी
शिमला में परिवहन मंत्री जीएस बाली की प्रेस वार्ता के दौरान एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक डा. आरएन बत्ता ने बताया कि इस तकनीक से बसों की स्पीड, लोकेशन और डीजल की ऐवरेज पर निगम प्रबंधन की नजर रहेगी।
डीजल चोरी रोकने में भी यह फायदेमंद रहेगी। बस में कितने यात्री सफर कर रहे हैं, किस स्टॉपेज से कितने यात्री बस में बैठे, इसकी जानकारी भी मिलेगी। बस में तकनीकी खराबी आने पर भी सिस्टम चेतावनी जारी करेगा।
डा. बत्ता ने बताया कि इस तकनीक से बसों में ओवरलोडिंग रोकने और टाइमटेबल एडजस्ट करने में भी मदद मिलेगी।
स्पीड बढ़ी तो आरएम को मैसेज
बस की स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक बढ़ने पर संबंधित डिपो के आरएम को मैसेज आएगा। आरएम परिचालक को फोन कर चालक को स्पीड कम करने की चेतावनी देगा। वहीं, एचआरटीसी बसों को इंटेलिजेंट रोड ट्रांसपोर्ट सिस्टम से लैस करने के बाद प्राइवेट बसों में भी इसे अनिवार्य कर दिया जाएगा।
उधर, सड़क सुरक्षा के महत्व को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग का नाम बदल कर रोड सेफ्टी एंड ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट रखा गया है। परिवहन मंत्री ने घोषणा की कि विभाग सिर्फ बसों का संचालन ही नहीं करेगा, बल्कि सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित कराना बड़ी जिम्मेवारी है। लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर ही सड़क सुरक्षा को विभाग के नाम से जोड़ा गया है।
श्रद्धालुओं को पहुंचाएंगे मंदिरों तक
बाली ने कहा कि त्योहारों और मेलों के दौरान भार वाहक वाहनों में यात्रियों को लाने ले जाने पर सख्त रोक रहेगी। लोगों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एचआरटीसी बसों की व्यवस्था करेगा। परिवहन मंत्री ने कहा कि नई ट्रांसपोर्ट पॉलिसी तो मैंने एक महीने पहले तैयार कर ली है। अब इसे कैबिनेट में ले जाना बाकी है। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा।