हिमाचल सरकार और कर्मचारियों की बैठक आज, ये हैं मुख्य मांगें
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हिमाचल सरकार और अराजपत्रित कर्मचारियों के बीच वीरवार को जेसीसी की बैठक होगी। इसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव वीसी फारका करेंगे। हालांकि, कर्मचारी संघों ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से खुद बैठक में आने का आग्रह किया है।
इसमें अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अलावा छोटे-बड़े विभागीय संगठनों को मिलाकर करीब अस्सी से ज्यादा संघों के पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठक से पहले अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने प्रेस वार्ता कर मांगें न मानने पर आर-पार की लड़ाई का एलान कर रखा है।
ऐसे में माना जा रहा है कि कर्मचारी बाहुल्य हिमाचल में चुनावी साल से पहले कर्मचारियों को बड़ी सौगात मिल सकती है। जेसीसी के एलान के बाद से ही कर्मचारियों ने मांगों की लंबी फेहरिस्त तैयार कर ली है।
वैसे तो छोटी-बड़ी मिलकार करीब 150 मांगें हैं, जिन पर जेसीसी में चर्चा होनी है, लेकिन सरकार और कर्मचारियों के बीच अहम टकराव कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र 58 से बढ़ाकर 60 करने का होगा।
पंजाब की तरह वेतनमान देने पर भी चर्चा
कर्मचारी संघों का कहना है कि चूंकि ज्यादातर सेवाओं में पहले ही 60 और 65 साल के सेवाकाल की व्यवस्था है। ऐसे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी साठ साल सेवाकाल दिया जाए। महासंघ के अध्यक्ष एसएस जोगटा ने कहा कि ऐसा होने से सरकार पर रिटायर हो रहे कर्मचारियों की देनदारियों का करीब 22 करोड़ का बोझ हटेगा।
साथ ही उस पैसे को नए युवाओं को नौकरी देने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। इसके अलावा दूसरा बड़ा मुद्दा 4-9-14 के इन्सेंटिव का होगा, जिसे वर्तमान सरकार ने ही बंद कर दिया था। इसके अलावा पंजाब की तरह सभी पद और वेतनमान देने की मांग पर चर्चा होनी है।
शिमला में कार्यरत कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों को भी ढाई सौ से बढ़ाकर पंद्रह सौ करने की मांग कर्मचारी उठाएंगे। अब देखना यह होगा कि सरकार और कर्मचारियों के बीच कितनी मांगों पर समन्वय बन पाता है और बची मांगों को लेकर कर्मचारी संगठन किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।
फिलहाल, वीरवार को होने वाली बैठक में मुख्य सचिव के अलावा वित्त और कार्मिक विभाग के अफसरों के अलावा कर्मचारी संघों के करीब तीन सौ पदाधिकारी शामिल होंगे।
परिसंघ बोला - मुद्दे से भटकाने को रिटायरमेंट एज बढ़ाने की मांग
सरकार और कर्मचारी महासंघ के बीच वीरवार को होने वाली जेसीसी बैठक को लेकर कर्मचारी परिसंघ ने सवाल उठा दिए हैं। प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के वे विरोधी नहीं हैं, लेकिन यह सरकार का नीतिगत फैसला है। इसलिए ऐसे मुद्दों को जेसीसी में शामिल नहीं करना चाहिए। कहा कि महासंघ के नेता जेसीसी को मुद्दे से भटकाने के लिए रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने की मांग को उठा रहे हैं।
कहा कि कर्मचारी नेता अपना रिटायरमेंट नजदीक आने पर जेसीसी में रिटायरमेंट को मुद्दे के रूप में शामिल करते हैं। विनोद कुमार ने कहा कि जनवरी 2016 से लंबित 7 प्रतिशत महंगाई भत्ते की किस्त का भुगतान करने की मांग की जानी चाहिए। परिसंघ की सरकार से मांग है कि अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड और लोक सेवा आयोग के माध्यम से अनुबंध आधारित नियुक्तियों की नियमितीकरण की अवधि को 5 साल की बजाय 3 साल किया जाये।
परिसंघ अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के विभागों में कुछ वर्गों के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में जुड़ी अव्यवहारिक शर्तों के कारण कर्मचारियों की पदोन्नतियां सालों से रुकी पड़ी है, इसलिए ऐसे नियमों की पुनर्समीक्षा कर कर्मचारियों को पदोन्नति के अवसर प्रदान किए जाएं।
शिक्षकों की अलग जेसीसी बुलाने की मांग
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने शिक्षकों के लिए अलग से जेसीसी करवाने की मांग की है। संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने इस मांग को लेकर मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव सुभाष आहलुवालिया से मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि वीरवार को सरकार ने एनजीओ के साथ जेसीसी बुलाई है। इसी तर्ज पर 80 हजार शिक्षकों की मांगों को हल करने के लिए अलग से जेसीसी बुलाई जाए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने बीते संघ के राज्य स्तरीय सम्मेलन में शिक्षकों की अलग से जेसीसी करवाने की मांग को स्वीकार किया था।
नहीं बढ़ाई जाए सेवानिवृत्ति आयु
प्रदेश पदोन्नत स्कूल प्राध्यापक संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त उपनिदेशक जीवन शर्मा ने मुख्यमंत्री से प्रदेश में सेवानिवृत्ति आयु को नहीं बढ़ाने की मांग की है। जीवन शर्मा ने कहा कि वीरवार को होने वाले जेसीसी में मुख्यमंत्री को इस तरह का कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से प्रदेश के हजारों प्रशिक्षित बेरोजगारों के साथ अन्याय होगा।