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बिजली बोर्ड ने कहा: स्मार्ट मीटर से नहीं पड़ेगा बिजली के बिलों पर असर, निशुल्क 125 यूनिट भी रहेंगे जारी; जानें

Wed, 21 Jan 2026 10:09 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 21 Jan 2026 10:09 PM IST
सार

Smart Bijli Meter: हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटरों पर लगातार लोग सवाल उठा रहे हैं। वहीं, बिजली बोर्ड ने भी सभी आरोपों को नकारा है। बोर्ड का कहना है कि स्मार्ट मीटर से बिजली के बिलों पर असर नहीं पड़ेगा। जानें विस्तार से...

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hp electricity board said Smart meters will not affect electricity bills and free 125 units will also continue
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

राज्य बिजली बोर्ड ने सोशल मीडिया पर स्मार्ट बिजली मीटरों पर उठाए जा रहे सवालों को नकारते हुए कहा है कि स्मार्ट मीटर की रीडिंग पर अगर किसी को संदेह है तो दूसरा मीटर लगाकर गड़बड़ी को पकड़ा जा सकता है। बुधवार को बोर्ड प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में बताया कि स्मार्ट मीटर से बिजली के बिलों पर असर नहीं पड़ेगा। यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर की रीडिंग पर संदेह हो, तो प्रदेश सरकार ने मौजूदा मीटर के साथ दूसरा स्मार्ट मीटर लगाने की अनुमति भी दी है। इससे उपभोक्ता हर 15 मिनट में अपनी बिजली खपत की जानकारी स्वयं देख सकता है। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है, तो उपभोक्ता अपने संबंधित विद्युत उप-मंडल कार्यालय से संपर्क कर सकता है।

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'बिजली सब्सिडी कोई असर नहीं'
राज्य बिजली बोर्ड के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जाने से बिजली सब्सिडी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 125 यूनिट तक मिलने वाली मुफ्त बिजली की सुविधा पूरी तरह से पहले की तरह जारी रहेगी और स्मार्ट मीटर लगने से बिजली के बिलों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में अब तक 7.5 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।

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'सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा भ्रम'
स्मार्ट मीटर केवल बिजली खपत को मापने का एक उपकरण है, ठीक वैसे ही जैसे पुराने सामान्य मीटर होते हैं। इसका बिजली की दरों (टैरिफ) या बिलिंग नीति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह सही जानकारी के अभाव में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किए जाने का परिणाम है। उन्होंने बताया कि पुराने मीटरों में कई बार मासिक आधार पर औसत रीडिंग से बिल जारी कर दिए जाते थे, चाहे उपभोक्ता ने बिजली का उपयोग किया हो या नहीं, जबकि स्मार्ट मीटर में वास्तविक खपत के आधार पर ही बिल बनेगा। यदि उपभोक्ता बिजली का उपयोग नहीं करता है, तो उसे नियमित रूप से औसत बिल नहीं मिलेगा।

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'अफवाहों पर भरोसा न करें लोग'
प्रवक्ता ने बताया कि स्मार्ट मीटर में बिजली खपत का डाटा अपने आप एक केंद्रीय डाटा सेंटर तक पहुंच जाता है, जिससे सही बिलिंग, बेहतर ऑनलाइन सेवाएं और उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा मिल सकेगी। यह बदलाव केवल मीटर बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुमान या मैनुअल बिलिंग से हटकर वास्तविक समय (रियल-टाइम) डाटा आधारित प्रणाली की ओर एक बड़ा कदम है। प्रवक्ता ने बताया कि स्मार्ट मीटरों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस संबंध में फैलाई जा रही अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल प्रमाणित व सही जानकारी पर ही भरोसा करें।

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