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HP Assembly Session: सीएम सुक्खू बोले- ऋणी गरीब लोगों के लिए बदलेंगे सहकारी बैंकों की वन टाइम सेटलमेंट नीति

Sat, 21 Dec 2024 05:48 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, तपोवन (धर्मशाला)
अमर उजाला ब्यूरो, तपोवन (धर्मशाला) Published by: Krishan Singh Updated Sat, 21 Dec 2024 05:48 PM IST
सार

विधानसभा के शीत सत्र के अंतिम दिन की कार्यवाही में प्रश्नकाल 11:00 बजे बिना किसी गतिरोध के शुरू हुआ।  प्रश्नकाल में नए संस्थानों को खोलने के मामले में दोनों पक्षों में हल्की नोकझोंक हुई।

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hp assembly winter session: Question Hour began  without any deadlock
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीत सत्र के अंतिम दिन की कार्यवाही में प्रश्नकाल 11:00 बजे बिना किसी गतिरोध के शुरू हुआ। सदन में  मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि ऋणी गरीब लोगों के लिए सहकारी बैंकों की वन टाइम सेटलमेंट नीति को बदलने पर विचार किया जाएगा। विधायक सतपाल सिंह सत्ती के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वन टाइम सेटलमेंट के मामले 10 लाख रुपये से ऊपर के कर्ज के लिए भी लागू रहेंगे। पिछली सरकार ने पॉलिसी लाई तो कुछ ने फायदा उठाया और कुछ ने लाभ नहीं उठाया। ऐसे लोग जिनका लोन 10 लाख रुपये या इससे ऊपर हो गया। गरीब लोग जो ऋणी हैं, उनके लिए विचार करेंगे कि उन्हें कैसे राहत मिले। यह नीति न केवल सहकारी बैंक बल्कि राज्य कृषि सहकारी बैंक में भी लागू होगी। रिजर्व बैंक आफ इंडिया और नाबार्ड के नियमों पर विचार करने के बाद सरकार बदलाव करेगी। उधर, प्रश्नकाल में भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक में लोन की वन टाइम सेटलमेंट का मामला उठाया। सत्ती ने पूछा कि जिनका रोजगार नहीं चला और जो मुसीबत में हैं और जिनके कुर्की के आदेश जारी हो गए हैं, क्या उन्हें राहत देने का विचार होगा।

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हिमाचल में 42 फीसदी की दर से दिया जा रहा महंगाई भत्ता
 मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से अपने कर्मचारियों को मूल वेतन के 42 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता प्रदान किया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक 53 फीसदी महंगाई भत्ता दिया गया है। विधायक डॉ. जनकराज और रणधीर शर्मा के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार की तुलना में प्रदेश में कर्मचारियों और पेंशनरों को 11 फीसदी महंगाई भत्ता देना शेष है। इसके तहत 8,623 करोड़ रुपये का एरियर दिया जाना है। वतर्मान में 1,03,248 कर्मचारियों को ओपीएस का लाभ दिया गया है। 2078 कर्मचारी बिना ओपीएस के सेवानिवृत्त हुए हैं। चिकित्सा प्रतिपूर्ति की 57.92 करोड़ रुपये की देनदारियां शेष हैं। 

 

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विभागों और उपक्रमों में 19,594 आउटसोर्स कर्मी कार्यरत
 भाजपा विधायक जीतराम कटवाल के सवाल का लिखित जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि विभागों और उपक्रमों में 19,594 आउटसोर्स कर्मी कार्यरत हैं। प्रदेश वित्तीय निगम 2009 के तहत सरकारी विभागों में आउटसोर्स आधार पर सेवाएं लेने का प्रावधान है। सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों की कार्य परिस्थितियों व सेवा शर्तों के संरक्षण के लिए सरकार ने जुलाई 2017 को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी विभागों को आउटसोर्स कर्मियों को हर माह की सात तारीख तक वेतन जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कर्मियों के लिए किसी निगम या एजेंसी की स्थापना करने का प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है। 

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नशाखोरों के खिलाफ 5332 मामले किए गए दर्ज
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में तीन वर्षों में नशाखोरों के खिलाफ 5332 मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें 520 अभियोग अन्वेषणाधीन और 4627 न्यायालय में विचाराधीन हैं। 185 मामलों का निपटारा न्यायालय की ओर से कर दिया गया है। इन मामलों में से 111 मामलों में सजा और 74 मामलों में आरोपी बरी हुए हैं। कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी के सवाल का लिखित जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि कुल 5332 अभियोगों में 8004 आरोपी गिरफ्तार किए गए। 2355 आरोपियों को पुलिस ने नोटिस देकर छोड़ा। 96 कोर्ट से बरी हो चुके हैं। 5554 आरोपियों को जेल भेजा गया है। प्रदेश को नशामुक्त करने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग मांगा गया है। केंद्रीय अधिनियम एनडीपीएस एक्ट 1985 में हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तावित संशोधनों को सम्मिलित किया जाए। इससे नशे और इसके व्यापार में शामिल अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा सके।

इतना निर्दयी जीजा मैनें नहीं देखा
जसवां परागपुर के भाजपा विधायक बिक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री पर चुटकी लेते हुए कहा कि इतना निर्दयी जीजा मैंने नहीं देखा। हमारे क्षेत्र में संस्थानों को खोलने की जरूरत नहीं महसूस की जाती। फिर देहरा की विधायक और मुख्यमंत्री की पत्नी कमलेश ठाकुर की ओर इशारा कर बोले - पता नहीं, बहन जी आप बोलते भी हैं कि नहीं। इस पर सदन में खूब ठहाके लगे। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिक्रम जी गुस्सा नहीं करते। बिक्रम सिंह ने पलटवार कर कहा-मेरी शक्ल ही ऐसी है।

हंसराज पूर्व सरकार में घोर विपक्ष में थे
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा विधायक हंसराज पर चुटकी लेते हुए कहा कि हंसराज पिछली सरकार में घोर विपक्ष में थे। जब काम न हो तो घोर विपक्ष होता है। इस सरकार में हंसराज विपक्ष में हैं। इसको लेकर सदन में खूब ठहाके लगे। इससे पहले हंसराज ने कहा कि केवल मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री के क्षेत्रों और देहरा में ही जरूरत आधारित संस्थान नहीं खोले जाने चाहिए। उनके चुराह क्षेत्र पर भी नजर डालनी चाहिए।

दामाद का ख्याल नहीं रख रहे उपमुख्यमंत्री
भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने हरोली में बंद हुए संस्थान खोलने का मामला सदन में उठाया। इस पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि रणधीर शर्मा हरोली के दामाद हैं और ससुराल का विरोध कर रहे हैं। इस पर रणधीर शर्मा ने कहा कि मुकेश जी आप भी दामाद का ख्याल नहीं रख रहे हैं।
 

समोसे और मुर्गे की राजनीति करता है विपक्ष
- मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष समोसे और मुर्गे की राजनीति करता है। हम विकास में विश्वास रखते हैं। मुख्यमंत्री ने विधायक रणधीर शर्मा पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि सब जानते हैं कि आप नेता विपक्ष बनना चाहते हैं। इस लिए ही बात-बात पर सवाल उठाते रहते हैं।

जुब्बल कोटखाई में कम दाखिलों वाले 19 स्कूल किए बंद
- शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र जुब्बल कोटखाई में भी कम विद्यार्थियों की संख्या वाले 19 स्कूल बंद किए हैं। मुख्यमंत्री के नादौन विधानसभा क्षेत्र में भी स्कूल बंद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दस साल में देशभर में 76 हजार स्कूल बंद हुए हैं। गुजरात राज्य से इसकी शुरुआत हुई है।

इन विभागों के 1865 कार्यालय हुए हैं बंद
- कृषि विभाग के सात, पशुपालन विभाग के 101, आयुष विभाग के 44, प्रारंभिक शिक्षा विभाग के 1094, वन विभाग के दो, सामान्य प्रशासन विभाग के दो, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के 257, उच्चतर शिक्षा विभाग के 91, गृह विभाग के 19, उद्यान विभाग के चार, उद्योग विभाग का एक, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का एक, जल शक्ति विभाग के 46, श्रम एवं रोजगार विभाग के नौ, बहुउद्देशीय परियोजनाएं एवं ऊर्जा विभाग के 35, कार्मिक विभाग का एक, लोक निर्माण विभाग के 16, राजस्व विभाग के 117, ग्रामीण विकास विभाग के 11, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग का एक, तकनीकी शिक्षा विभाग के पांच और शहरी विकास विभाग का एक संस्थान बंद किया गया है। राज्य में कुल 1865 संस्थान बंद हुए हैं।

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