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HP Assembly Session: बजट पर चर्चा में सीएम के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते सदन से बाहर गए

Fri, 21 Mar 2025 10:49 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 21 Mar 2025 10:49 PM IST
सार

सीएम के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया और नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए।  

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HP Assembly Session: Unsatisfied with CM's reply in budget discussion, opposition members walked out of the Ho
विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते सदन से बाहर गए। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पिछली सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन के कारण हिमाचल आर्थिक संकट झेल रहा है। केंद्र सरकार से 68 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न ग्रांट मिलने के बावजूद जयराम सरकार ने 40 हजार करोड़ का ऋण भी लिया। शुक्रवार दोपहर बाद विधानसभा सदन में बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से 2022 तक केंद्र सरकार से मिली ग्रांट और तत्कालीन सरकार की ओर से लिए गए ऋणों के आंकड़े भी पेश किए। इस पर भड़के भाजपा विधायकों ने सदन में हंगामा करते हुए नारेबाजी की। कुछ देर अपनी सीटों पर खड़े होकर विरोध करने के बाद भाजपा विधायक सदन से बाहर चले गए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट की आलोचना बहुत ही कमजोर रही। भाजपा विधायकों की ओर से लगाए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।

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विपक्ष की गैर मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व की भाजपा सरकार ने हिमाचल को कर्ज के जाल में फंसाया। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में हिमाचल को राजस्व घाटा अनुदान और जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में केंद्र सरकार से करीब 68 हजार करोड़ रुपये की उदार धनराशि प्राप्त हुई। भाजपा सरकार ने इस राशि को प्रदेश का कर्ज लौटाने या कर्मचारियों की वेतन आयोग की देनदारियां चुकता करने पर खर्च नहीं किया। चुनावों से पहले पांच हजार करोड़ रुपये की रेवड़ियां बाटीं।
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धड़ाधड़ कई शिक्षण संस्थान खोले। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने दो वर्ष के कार्यकाल में 29,046 करोड़ रुपये का ऋण लिया है। इसमें से 12,226 करोड़ रुपये पूर्व की सरकार के समय लिए गए ऋणों का ब्याज चुकाने और 8,087 करोड़ रुपये मूल चुकाने पर खर्च हुए हैं। विकास कार्यों के लिए सिर्फ 8,693 करोड़ रुपये ही बचे। पूर्व सरकार ने पांच साल के कार्यकाल में 40,352 करोड़ रुपये के ऋण लिए। वर्ष 2018-19 में 5745 करोड़, 2019-20 में 5000 करोड़, साल 2020-21 में 10,888 करोड़, 2021-22 में 8,321 करोड़ और दिसंबर 2022 तक 10,398 करोड़ रुपये के ऋण लिए।

उन्होंने कहा कि आरडीजी को कम करने और ऋण जुटाने की सीमा को सीमित करने के कारण प्रदेश को तीन हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस कारण ही बजट आकार में आगामी वित्त वर्ष के लिए ज्यादा वृद्धि नहीं हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओपीएस बहाल करने के चलते केंद्र सरकार ने राज्य की ऋण सीमा में 1,700 करोड़ रुपये की कटौती कर दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बीते दो सालों में सुशासन पर जोर दिया है और संसाधन जुटाने और फिजूलखर्ची को कम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के आगामी वित्त वर्ष के बजट में पूंजीगत व्यय के लिए 3,976 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। आय के अतिरिक्त संसाधन जुटाने पर यह राशि बढ़ाई जाएगी। वर्ष के अंत तक प्रदेश में पूंजीगत खर्चों पर 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट पर चर्चा में सत्ता और विपक्ष के 24-24 विधायकों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर मैंने कोई गलत जानकारी दी है तो विपक्ष मेरे खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव ला सकता है। 15 घंटे 30 मिनट तक चर्चा चली।

जयराम बोले, 38 हजार 276 करोड़ कर्ज का ब्याज चुकाया फिर भी रुकने नहीं दिया विकास
भाजपा जब सत्ता में आई थी तो 50 हजार करोड़ कर्ज विरासत में मिला था। कोरोना महामारी के दौरान भी प्रदेश में विकास नहीं रुकने दिया। 5 साल के कार्यकाल में पूर्व कांग्रेस सरकार के कर्ज के बदले 38,276 करोड़ रुपये ब्याज और ऋण की अदायगी की। सदन में बजट पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बाहर आने के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मीडिया से बातचीत के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की ऋण वापसी दर 95 फीसदी से अधिक थी, कार्यकाल के पहले 2 साल में ऋण अदायगी का प्रतिशत 131.5 फीसदी था। अगर हमारी सरकार ने 100 रुपये का कर्ज लिया तो 131 रुपये कर्ज अदायगी की। मुख्यमंत्री सुक्खू को इधर-उधर की बातें करने के बजाय अपनी सरकार की नाकामी को स्वीकार करना चाहिए। मुख्यमंत्री के असंगत फैसले और उनकी कार्य प्रणाली की वजह से पूरे प्रदेश की बार-बार किरकिरी हो रही है और लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। 
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