हिमाचल के हजारों शिक्षकों को मिली राहत, रिकवरी पर लगी रोक
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पुराने आदेशों का हवाला देते हुए प्रशिक्षित ग्रेजुएट टीचरों की पे फिक्सेशन कर रिकवरी में जुटे प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में मामला उठाने वाले शिक्षकों की रिकवरी पर रोक लगा दी है।
जिला उपनिदेशकों और स्कूल प्रिंसिपलों को संबंधित शिक्षकों की रिकवरी प्रक्रिया रोकने के आदेश प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने जारी कर दिए हैं। इन शिक्षकों को जहां कुछ राहत मिल गई है वहीं करीब दो हजार अन्य शिक्षकों से रिकवरी करने की तैयारियों में निदेशालय जुटा हुआ है।
पे फिक्सेशन के चलते टीजीटी का न्यूनतम पे बैंड 13900 रुपये तय हुआ है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मनमोहन शर्मा ने बताया है कि ट्रिब्यूनल ने नीना पुरी एवं अन्य द्वारा दायर मामले में रिकवरी को स्टे करने के आदेश दिए हैं।
उपनिदेशकों और प्रिंसिपलों की सैलरी भी नहीं कटेगी
इसी कड़ी में उपनिदेशकों और प्रिंसिपलों को रिकवरी नहीं करने को कहा गया है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में दो हजार से अधिक ट्रेंड ग्र्रेजुएट टीचरों (टीजीटी) के वेतन में एक हजार रुपये से अधिक की कटौती कर दी है।
इसी कड़ी में दिसंबर 2014 से अगस्त 2015 के बीच में नियमित हुए सभी टीजीटी से रिकवरी करनी है। अधिक पे बैंड के तहत जारी की गई राशि की रिकवरी करने की जगह शिक्षकों की सालाना इंक्रीमेंट में ज्यादा दिए गए वेतन को एडजस्ट करने का फैसला लिया है।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने न्यूनतम पे बैंड को 14430 रुपये के बजाय अब 13900 रुपये तय किया है। ऐसे में 2014-15 के दौरान नियमित होने वाले शिक्षकों को अगस्त महीने से पहले मिल रहे वेतन से कम वेतन मिलेगा। साल 2016 में नियमित हुए शिक्षकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इन्हें पहले ही 13900 के पे बैंड पर फिक्स किया गया है।
सीएम से की शिक्षकों से रिकवरी न करने की मांग
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री से विधानसभा में मुलाकात कर टीजीटी, पीजीटी, सीएंडवी और जेबीटी से रिकवरी नहीं करने की मांग की। संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने मुख्यमंत्री को बताया कि इनिशियल स्टार्ट जो कि प्रदेश सिविल सर्विस रूल 2009 के अनुसार दिया गया था, उसे 24 सितंबर 2012 के वित्त विभाग की अधिसूचना के आधार पर खत्म कर दिया गया है।
यह प्रावधान 2015 तक चलता रहा। 2016 में नियमित हुए 2500 अनुबंध शिक्षकों का इनिशियल स्टार्ट रोक दिया गया है। शिक्षकों को इस कारण वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। रिकवरी करने में भी शिक्षा विभाग जुट गया है। वीरेंद्र चौहान ने कहा चार साल बाद इस तरह की रिकवरी करना सरकार और कर्मचारी हित में नहीं है। इस अवसर पर महावीर कैंथला, हरनाम, अतुल, कैलाश ठाकुर और सुरेश भारद्वाज भी मौजूद रहे।