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Shimla News: एचपीयू की कैसी बढ़ेगी आय अभी तक नहीं बनी कमेटियां
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फीस और शुल्क बढ़ाकर 50 करोड़ जुटाना रखा है लक्ष्य
कुलपति की अध्यक्षता में 9 जनवरी को हुई बैठक में लिया था फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। खराब माली हालत से गुजर रहे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने भविष्य में संकट गंभीर होने की संभावनाओं को भांपते हुए प्रदेश सरकार से वार्षिक सहायता अनुदान को 152 से बढ़ाकर 250 करने की मांग की है। इसके साथ विवि ने 50 करोड़ तक अपने संसाधनों से अतिरिक्त आय जुटाने के लिए कसरत शुरू की थी लेकिन यह कवायद ढीली पड़ती नजर आ रही है।
कुलपति ने 9 जनवरी को हुई विवि की रिसोर्स मोबालाइजेशन कमेटी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए फीस और शुल्कों में वृद्धि करने, नए स्वयं वित्त पोषित कोर्स सीडीओई और सेंटर फाॅर इवनिंग स्टडीज विभाग में शुरू करने, परिवहन सेवाओं को आउटसोर्स करने और किराये में वृद्धि करने सहित कई अहम फैसले लिए थे। इससे विवि की आय में बढ़ोतरी होनी है। इन फैसलों को लागू करने के लिए अधिष्ठाता अध्ययन और प्रति कुलपति की अध्यक्षता में कमेटियां गठित करने की बात कही थी। लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आधिकारिक रूप से ऐसी कोई कमेटी नहीं बन पाई है।
विवि के कुलपति प्रो. एसपी बंसल ने आय बढ़ाने के मकसद से फीस और शुल्कों के अलावा छात्रों को दी जाने वाली ऑनलाइन सुविधा की एवज में तर्कसंगत शुल्क दरें तय करने, फीस बढ़ाने को डीएस की अध्यक्षता में कमेटी बननी थी, नए कोर्स शुरू करने, शाॅर्ट टर्म और लांग टर्म नए कोर्स शुरू करने, प्रिंटिंग प्रेस शुरू करने, सीडीओई नोयडा में संपत्ति को किराये पर देकर आय बढ़ाने के लिए प्रति कुलपति की अध्यक्षता में अलग से कमेटी गठित की जानी थी। इन दोनों ही कमेटियों का अभी तक गठन नहीं हो पाया है। इन फैसलों से करीब 50 करोड़ तक की आय होने की उम्मीद थी।
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आसान नहीं होगा फीस बढ़ाना
हिमाचल विवि को फीस और शुल्क में बढ़ोतरी करना आसान नहीं होगा। वर्ष 2015 में ही विवि ने परीक्षा से संबंधित फीस में एकमुश्त भारी वृद्धि की थी जिसका विरोध हुआ था। अभी भी कुलपति के दस फीसदी तक फीस और शुल्कों में वृद्धि के बयान के बाद छात्र संगठनों ने खुले तौर पर इसका विरोध करने की धमकी दे दी है।
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कुलपति की अध्यक्षता में 9 जनवरी को हुई बैठक में लिया था फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। खराब माली हालत से गुजर रहे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने भविष्य में संकट गंभीर होने की संभावनाओं को भांपते हुए प्रदेश सरकार से वार्षिक सहायता अनुदान को 152 से बढ़ाकर 250 करने की मांग की है। इसके साथ विवि ने 50 करोड़ तक अपने संसाधनों से अतिरिक्त आय जुटाने के लिए कसरत शुरू की थी लेकिन यह कवायद ढीली पड़ती नजर आ रही है।
कुलपति ने 9 जनवरी को हुई विवि की रिसोर्स मोबालाइजेशन कमेटी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए फीस और शुल्कों में वृद्धि करने, नए स्वयं वित्त पोषित कोर्स सीडीओई और सेंटर फाॅर इवनिंग स्टडीज विभाग में शुरू करने, परिवहन सेवाओं को आउटसोर्स करने और किराये में वृद्धि करने सहित कई अहम फैसले लिए थे। इससे विवि की आय में बढ़ोतरी होनी है। इन फैसलों को लागू करने के लिए अधिष्ठाता अध्ययन और प्रति कुलपति की अध्यक्षता में कमेटियां गठित करने की बात कही थी। लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आधिकारिक रूप से ऐसी कोई कमेटी नहीं बन पाई है।
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विवि के कुलपति प्रो. एसपी बंसल ने आय बढ़ाने के मकसद से फीस और शुल्कों के अलावा छात्रों को दी जाने वाली ऑनलाइन सुविधा की एवज में तर्कसंगत शुल्क दरें तय करने, फीस बढ़ाने को डीएस की अध्यक्षता में कमेटी बननी थी, नए कोर्स शुरू करने, शाॅर्ट टर्म और लांग टर्म नए कोर्स शुरू करने, प्रिंटिंग प्रेस शुरू करने, सीडीओई नोयडा में संपत्ति को किराये पर देकर आय बढ़ाने के लिए प्रति कुलपति की अध्यक्षता में अलग से कमेटी गठित की जानी थी। इन दोनों ही कमेटियों का अभी तक गठन नहीं हो पाया है। इन फैसलों से करीब 50 करोड़ तक की आय होने की उम्मीद थी।
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आसान नहीं होगा फीस बढ़ाना
हिमाचल विवि को फीस और शुल्क में बढ़ोतरी करना आसान नहीं होगा। वर्ष 2015 में ही विवि ने परीक्षा से संबंधित फीस में एकमुश्त भारी वृद्धि की थी जिसका विरोध हुआ था। अभी भी कुलपति के दस फीसदी तक फीस और शुल्कों में वृद्धि के बयान के बाद छात्र संगठनों ने खुले तौर पर इसका विरोध करने की धमकी दे दी है।