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बागवानी: तीन श्रेणियों में एमएसपी मांग रहे हैं हिमाचल के सेब बागवान

Wed, 01 Sep 2021 11:11 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 01 Sep 2021 11:11 AM IST
सार

केंद्र सरकार ने विशेष दर्जा देते हुए कश्मीर के सेब को एमएसपी दिया है और यह योजना वर्ष 2019 से लागू है। वहां के बागवानों को भी सेब का एमएसपी ए, बी और सी ग्रेड के हिसाब से 60, 40 और 25 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से दिया जा रहा है। हिमाचल के किसानों को मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सी ग्रेड के सेब का 9.50 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य दिया जाता है। ए और बी ग्रेड के सेब को कोई समर्थन मूल्य नहीं दिया जाता है। 

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Horticulture: Apple growers of Himachal demanding MSP in three categories
सब्जी एवं फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सेब का तीन श्रेणियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने के लिए सरकार पर दबाव डाला जाने लगा है। जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर प्रदेश के बागवान ए ग्रेड सेब के 60, बी ग्रेड के 40 और सी ग्रेड के 25 रुपये प्रति किलोग्राम एमएसपी मांग रहे हैं। दूसरी ओर सेब बागवान ब्लॉक स्तर पर लामबंद होने लगे हैं ताकि मांगों को पूरा करवाया जा सके। केंद्र सरकार ने विशेष दर्जा देते हुए कश्मीर के सेब को एमएसपी दिया है और यह योजना वर्ष 2019 से लागू है।वहां के बागवानों को भी सेब का एमएसपी ए, बी और सी ग्रेड के हिसाब से 60, 40 और 25 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से दिया जा रहा है।

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हिमाचल के किसानों को मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सी ग्रेड के सेब का 9.50 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य दिया जाता है। ए और बी ग्रेड के सेब को कोई समर्थन मूल्य नहीं दिया जाता है।  वर्तमान में सेब सीजन में तेजी आते ही अच्छे सेब के दाम भी लुढ़क गए हैं। इससे बागवानों की चिंता बढ़ने लगी है। हिमाचल प्रदेश सब्जी एवं फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि बागवान लंबे समय से सरकार से मामला उठाते रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर सेब का न्यूनतम समर्थन मूल्य 60, 40 और 25 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दिया जाए। जम्मू-कश्मीर में कें द्र सरकार ने योजना के लिए 2500 करोड़ का प्रावधान किया है। वहां केंद्र और यूटी सरकार को 50:50 के हिसाब से खर्च वहन करना होता है। 
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अडानी के कोल्ड स्टोर के बाहर हल्ला बोलेगी कांग्रेस
उधर, कांग्रेस के महासचिव महेश्वर चौहान ने कहा कि अडानी और लदानी प्रदेश के बागवानों को लूट रहे हैं और ऐसी नाजुक स्थिति में हिमाचल के बागवानी मंत्री पूरे परिदृश्य से गायब हैं। सरकार मूकदर्शक बन कर तमाशा देख रही है। प्रदेश सरकार बाहरी देशों से सेब आयात पर रोक लगाने का मामला केंद्र सरकार से उठाए। कांग्रेस एक सितंबर को जिला शिमला के  बिट्ल में अडानी के कोल्ड स्टोर के बाहर धरना देंगे। सेब के दामों में अचानक गिरावट आना बागवानों के लिए चिंता का विषय है। इससे साफ  नजर आ रहा है कि सरकार और पूंजीपतियों की मिलीभगत से ये सब कुछ किया जा रहा है। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में सेब को विशेष उत्पाद श्रेणी का दर्जा दिलाने और सेब पर आयात शुल्क तीन गुना बढ़ाने की बात की थी। ऐसे समय में मुख्यमंत्री का सेब तुड़ान रोकने का बयान भी निराशाजनक है। 
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