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नौ महीने का इंतजार और 45 मीटर खुदाई के बाद मिला टनल में दबे मजदूर का शव

Sun, 10 Jul 2016 10:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिलासपुर/नेरचौक (मंडी)
ब्यूरो/अमर उजाला, बिलासपुर/नेरचौक (मंडी) Updated Sun, 10 Jul 2016 10:46 AM IST
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Hirda ram deadbody found in tihra tunnel
मलबे से हिरदा राम का शव निकालते हुए रेस्कयू टीम।

टिहरा टनल हादसे के करीब नौ महीने बाद मिले हिरदा राम के शव तक पहुंचने के लिए कंपनी ने पांच महीने तक 45 मीटर  खुदाई की उसके बाद हिरदा राम का शव बरामद हुआ। सभी परीक्षणों के बाद हिरदा राम के शव को निकालने का काम फरवरी 2016 में शुरू किया गया था। करीब पांच महीने तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद 40 से 45 मीटर तक मलबा निकाला गया।

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इसके बाद 8 जुलाई को हिरदा राम का शव बरामद किया गया। चार दिन पहले टनल में हिरदा राम का एक जूता बरामद हुआ था। इसके बाद शरीर का कुछ हिस्सा भी दिखा और शुक्रवार दोपहर को उनका शव बरामद कर लिया गया। विदित रहे कि 12 सितंबर 2015 को टनल धंसने से हुए हादसे में हिरदा राम सहित अन्य मजदूर अपने बचाव के लिए भागे।
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इसमें सभी मजदूर तो सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए, मगर हिरदा राम मलबे की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे। हिरदा राम यदि दो मिनट पहले अन्य साथियों के साथ वहां से भाग निकलते थे तो अन्य मजदूरों की तरह हिरदा राम की जान भी बच सकती थी। हादसे के समय मौके पर अफरा तफरी मच गई और ज्यादातर मजबूर टनल के बाहर की ओर भागे।

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हिरदा राम मलबे की चपेट में आकर जान गंवा बैठा

Hirda ram deadbody found in tihra tunnel
टिहरा टनल

इसमें सभी मजदूर तो सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए, मगर हिरदा राम मलबे की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे। हिरदा राम यदि दो मिनट पहले अन्य साथियों के साथ वहां से भाग निकलते थे तो अन्य मजदूरों की तरह हिरदा राम की जान भी बच सकती थी। हादसे के समय मौके पर अफरा तफरी मच गई और ज्यादातर मजबूर टनल के बाहर की ओर भागे।

मगर टनल के अगले छोर पर काम कर रहे सतीश तोमर और मनी राम के साथ हिरदा राम टनल के अंदर की ओर भागे। इसमें दो साथी तो सुरक्षित जगह पर पहुंच गए। लेकिन हिरदा राम मलबे की चपेट में आ गए। शायद दो मिनट का मौका मिलता तो आज हिरदा राम भी इस दुनियां में होते। 12 दिन चले रेस्क्यू ऑपरेशन में सतीश तोमर और मनी राम को प्रशासन ने सुरक्षित बचाने में बड़ी सफलता हासिल की थी।

मगर बाद में जमीन धंसने के खतरे को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन को रोक लिया गया था। इसके करीब चार दिन बाद दोबारा काम शुरू किया गया। इसमें पहले पहाड़ी को मजबूत बनाने का काम किया गया। जहां टनल धंसी थी, उसके करीब 45 मीटर खुदाई के बाद हिरदाराम का शव निकाला गया। अभी भी 17 मीटर की खुदाई शेष है।

रात को साढ़े दस बजे हुआ हिरदाराम का अंतिम संस्कार

Hirda ram deadbody found in tihra tunnel
हिरदा राम

करीब नौ माह बाद नेरचौक-किरतपुर फोरलेन टिहरा टनल में दबे हिरदाराम का शव शुक्रवार को करीब नौ बजे पैतृक गांव दियारगी पहुंचा। रात को साढ़े दस बजे हिरदाराम का अंतिम संस्कार काटव श्मशानघाट में किया गया। हिरदाराम की बड़ी पत्नी के बेटे प्रवीण ने मुखाग्नि दी। गांव में नौ माह बाद पहुंचे हिरदाराम के शव को देखकर हर किसी की आंख नम थी।

रिश्तेदार हिरदाराम की बड़ी पत्नी शशिकला और छोटी पत्नी कुब्जा देवी को दिलासा दे रहे थे। अंतिम संस्कार के समय प्रशासन से तहसीलदार बल्ह जयगोपाल शर्मा के अलावा पंचायत प्रधान तुलसी देवी, उपप्रधान राकेश मौजूद रहे। बिलासपुर के पुलिस कर्मचारी, रिश्तेदार तथा ग्रामीण उपस्थित रहे।

प्रधान तुलसी देवी ने कहा कि देर शाम नौ बजे के बाद हिरदाराम का शव दियारगी गांव पहुंचा। बताया कि प्रवीण दुबई में नौकरी करता है। प्रवीण की छुट्टी वीरवार को खत्म हो गई थी, लेकिन पिता के शव के मिलने की उम्मीद दिखते ही कंपनी अधिकारियों से बात कर छुट्टी बढ़ा ली थी। शनिवार को दिनभर घर में ढांढस बंधाने के लिए रिश्तेदारों का तांता लगा रहा।

 

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