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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   #hindihainhum: Hindi is the Bindi of Mother India's forehead and pride of India

#हिंदीहैंहम: भारत माता के माथे की बिंदी और हिंदुस्तान की शान है हिंदी

Sat, 12 Sep 2020 03:32 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, नाहन (सिरमौर)
अमर उजाला नेटवर्क, नाहन (सिरमौर) Published by: Krishan Singh Updated Sat, 12 Sep 2020 03:32 PM IST
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#hindihainhum: Hindi is the Bindi of Mother India's forehead and pride of India
सिरमौर के हिंदी प्रेमी - फोटो : अमर उजाला

भारत माता के माथे की बिंदी, हिंदुस्तान की शान है हिंदी...। ऐसी ही पंक्तियों और अपने बहुमूल्य विचारों के साथ सिरमौर के हिंदी प्रेमी अमर उजाला के हिंदी हैं हम...अभियान के साथ जुड़े। मौका था अमर उजाला की ओर करवाए गए ऑनलाइन संवाद का। इस मौके पर कवियों, साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने अपनी बेबाक राय रखी। कवि चिरआनंद ने नवगीत, संगीत और गजलें गाने लगी है हिंदी, इक्कीसवीं सदी में छाने लगी है हिंदी...पंक्तियों से हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला। कवयित्री विजय रानी बंसल ने भारत मां के माथे की हैं बिंदी, हिंदुस्तान की शान है हिंदी, व्याकरण का खजाना अनमोल, शुद्ध उच्चारण बिना सब डांवाडोल ... कविता से हिंदी के व्याकरण की विशेषताओं को प्रस्तुत किया।

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देश की शान है हिंदी: डोलमा
स्नातकोत्तर महाविद्यालय नाहन में हिंदी की प्रवक्ता मोल्लम डोलमा ने कहा कि हिंदी देश की शान है, देश की पहचान है। हिंदी ने स्वाधीनता की लौ कम नहीं होने दी। हिंदी के बिना देश गूंगा हो जाएगा। यह राष्ट्र की आत्मा है। इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना अति आवश्यक है।
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अनिवार्य हो तो ही लांघे लक्ष्मण रेखा: जोशी
वरिष्ठ साहित्यकार भुवन जोशी ने कहा कि भारत के अधिकांश भू-भाग पर हिंदी बोली जा रही है। हिंदी भाषा का समृद्ध साहित्य है। हिंदी प्रेमियों को चाहिए कि वह अधिक से अधिक हिंदी में बात करें। ज्ञान दर्शन के लिए अन्य भाषाओं का प्रयोग अनिवार्य हो तो ही लक्ष्मण रेखा पार करनी चाहिए। 
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लगातार बढ़ रहा हिंदी का प्रसार: सैनी
वरिष्ठ साहित्यकार रामकुमार सैनी ने कहा कि हिंदी के प्रसार का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। सरकारी और व्यक्तिगत स्तर पर भी काफी प्रयास हो रहे हैं, लेकिन हिंदी भाषा के प्रयोग में आमजन की हिंदी भाषा का उपयोग न होना, इसके कदमों को रोक रहा है। आम बोलचाल की हिंदी भाषा का सरकारी स्तर पर उपयोग हो तो इसके प्रसार में तेजी आ सकती है।

उच्च शिक्षा संस्थानों में हो हिंदी का विकल्प: उल्फत
युवा शायर जावेद उल्फत ने कहा कि हिंदी अब पूरे भारत में बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है। विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय बोलियों को राजभाषा बनाने की मांग उठती रही है। वह हिंदी की गरिमा कम करती है। उच्च शिक्षा में अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी को भी माध्यम बनाया जाना चाहिए। 

खुद प्रण लेने से बढ़ेगा हिंदी का मान: विनिता
नाहन कॉलेज की प्रो. डॉ. विनिता पाल ने कहा कि हम खुद चाहें तो हिंदी को उचित स्थान दिला सकते हैं। खुद से ही प्रण करना होगा। आज, हिंदी को लेकर कई तरह के कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। सरकारी स्तर पर भी इसका व्यापक रूप देखने को मिल रहा है।

धीमे ही सही, आगे बढ़ रही हिंदी: विनोद
साहित्यकार शून्य विनोद ने कहा कि हमारी ही कमियों के कारण हिंदी आज शिखर पर नहीं है। फिर भी आशा की किरणें नजर आ रही हैं। वर्तमान व्यवस्था और सरकारें धीमे ही सहीं, हिंदी को उसके स्थान की ओर अग्रसर कर रही हैं। सरकारी कार्य-व्यवहार में हिंदी को भरपूर अधिमान दिया जा रहा है। 


हिदी को मिले राष्ट्रभाषा का दर्जा
कवि डॉ. ईश्वर राही ने कहा कि हिंदी वर्षों से बहती जलाधारा है। हिंदी राजभाषा, मात्र भाषा कही जाती है। लेकिन, दुख की बात है कि इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा नही मिल पाया। अब हिंदी वैश्ववीकरण का रूप ले रही है। सोशल मीडिया पर हो रहे इसके प्रचार-प्रसार से उम्मीद की किरण जगी है।

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