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हाइड्रोलॉजिस्ट की रिपोर्ट में खुलासा, भविष्य के लिए बड़े खतरे का संकेत

Mon, 23 Apr 2018 01:51 PM IST
संजय भारद्वाज, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
संजय भारद्वाज, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर) Updated Mon, 23 Apr 2018 01:51 PM IST
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Himalayan glaciers are shrinking ground water level is going down: Hydrologist report

पर्वतीय क्षेत्रों में मानवीय दखल बढ़ने, समय पर बर्फबारी न होने और ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर सिकुड़ते जा रहे हैं। इसका असर भूमिगत जल स्तर पर भी पड़ रहा है, जो तेजी से गिरता जा रहा है। आईपीएच विभाग के हाइड्रोलॉजिस्ट विंग की ताजा रिपोर्ट से भी यह खुलासा हुआ है। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के नाहन शहर का भूजल हर साल प्वाइंट 37 मीटर की दर से गिर रहा है।

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वहीं, हिमालय रेंज के ग्लेशियर हर साल प्वाइंट 36 मीटर की दर से ऊपर की ओर खिसक रहे हैं। आने वाले समय के लिए इस स्थिति को खतरे का संकेत माना जा रहा है। आईपीएच विभाग के अनुसार नाहन शहर को सप्लाई होने वाली खैरी पेयजल योजना के बोरवेल का स्तर 100 फीट तक नीचे पहुंच गया है।
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90 के दशक में इस योजना में 80 फीट गहराई से पानी निकाला जाता था। वर्तमान में यह गहराई 200 से 250 फीट तक पहुंच गई है। आईपीएच के हाइड्रोलॉजिस्ट विंग की रिपोर्ट के मुताबिक भूमिगत जल में भारी कमी आ रही है। शिवालिक रेंज के कालाअंब, खैरी, त्रिलोकपुर, कुंडारीवाला, जोहड़ों के बोरवेलों का स्तर काफी नीचे गिर गया है।

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भविष्य के लिए बड़े खतरे का संकेत

Himalayan glaciers are shrinking ground water level is going down: Hydrologist report

विंग के सीनियर टेक्निकल असिस्टेंट जावेद ने बताया कि पानी का स्तर गिर रहा है, जो भविष्य के लिए बड़े खतरे का संकेत है। उधर, सर्दियों में बर्फबारी कम हो रही है तो स्नो लाइन भी ऊंचे इलाकों की ओर खिसकती जा रही है। अक्सर बर्फ से लकदक रहने वाली सिरमौर के चूड़धार की चोटियों में इस बार नाममात्र बर्फ है।

जीबी पंत हिमालयन एवं पर्यावरणीय विकास संस्थान कुल्लू के पर्यावरणीय वैज्ञानिक डॉ. जेसी कुनियान के शोध के अनुसार वर्ष 1962 में पार्वती ग्लेशियर के मुहाने की ऊंचाई समुद्रतल से 3987 मीटर थी। वर्ष 2016 में यह 4226 मीटर पहुंच गई।

डॉ. कुनियान के अनुसार हर साल ग्लेशियर पीछे खिसक रहे हैं, जिससे ग्राउंड वाटर लेवल और सरफेस वाटर में कमी आ गई है। मैदानी इलाकों में पानी की खपत बढ़ना भी इसकी वजह है। ऐसे पेड़ लगाने होंगे, जो पानी को रिस्टोर करते हैं।

ज्यादा खपत भी बड़ा कारण

Himalayan glaciers are shrinking ground water level is going down: Hydrologist report

सिरमौर के कालाअंब क्षेत्रों में जहां भूमिगत जल का स्तर गिरा है, वह औद्योगिक क्षेत्र है। इस इलाके में कई निजी बोरवेल भी लगे हुए हैं। भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन होना भी पानी का स्तर गिरने का एक कारण है। वर्तमान में खैरी योजना से लगभग 35 लाख लीटर पानी रोजाना दोहन किया जा रहा है।  

ऐसे रिचार्ज किए जाएंगे भूमिगत जल स्रोत- वाटर लेवल गिरने से चिंतित हाइड्रोलॉजिस्ट विंग ने डायरेक्ट इंजेक्शन विधि से पेयजल स्रोतों को रिचार्ज करने का प्राक्कलन बनाया है। इसे आईपीएच विभाग को सौंपा गया है।

इसके तहत बारिश के पानी को रिस्टोर कर पाइपों के माध्यम से बोरवेल के समीप से डाला जाएगा। इससे भूमिगत जल का स्तर ऊपर आएगा। जावेद के मुताबिक यह विधि सरल और भूमिगत जल को जल्द रिचार्ज करने में मददगार है। उन्होंने इसके लिए कुल 14 साइट चिह्नित की हैं।

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