सऊदी अरब में होता है गुलामों जैसा व्यवहार, मंडी के युवकों ने सुनाई आपबीती
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सऊदी अरब में रोजगार के लिए गए मंडी के युवकों से गुलामों जैसा व्यवहार होता है। रियाद में आग उगलने वाली लू में उनके कान-नाक से खून निकलता था। आंखों में धूल से जलन होने पर भी उन्हें जबरन लोडर और जेसीबी चलाने को दिए जाते थे।
12 घंटे काम करने के बाद उन्हें टीन के शेड में बंधक की तरह सोने को मजबूर होना पड़ता है। यह आपबीती सऊदी अरब से हैदराबाद पहुंचने पर सुंदरनगर के भोजपुर निवासी हरजिंदर सिंह, बल्ह के डडोह निवासी अश्वनी सांख्यान और जोगिंदर कुमार ने देर शाम फोन पर विशेष वार्ता में सुनाई।
सऊदी अरब में फंसे हिमाचल के 13 युवकों में से तीन भारत लौट आए हैं। देर शाम वे रियाद से विमान में हैदराबाद पहुंचे। उन्हें रात को विमान से ही दिल्ली और फिर सोमवार को सुंदरनगर भेजा जाएगा।
युवकों को ऐसे किया प्रताड़ित
तीनों युवकों ने बताया कि उन्हें कहा गया था कि वह वहां की एक कंपनी में काम करेंगे, लेकिन जब वह पहुंचे तो उन्हें वहां बदू (लोकल ठेकेदार) के पास भेजा गया। उनके सारे दस्तावेज लेकर उन्हें आगे एक कंपनी के पास नौकर रखवा दिया।
सर्दियों में उन्हें हीटर तक नहीं दिए। वहां आठ घंटे काम करने के 1800 रियाल (करीब 35 हजार) मासिक वेतन और ओवरटाइम का अलग से भुगतान करने की बात कही थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बंधकों की तरह उनसे 12 घंटे काम लिया जाता।
उन्होंने जब उनसे पशुओं जैसा व्यवहार करने का विरोध किया तो प्रताडि़त करते थे। इस बारे में उन्होंने एजेंट को भी उसके सऊदी अरब आने पर बताया था, जिसने काम करने के लिए तकलीफें सहने की नसीहत दी।
तत्काल पासपोर्ट बनाकर भारत भेजा
बीमारी की हालत में भी उन्हें कोई चिकित्सीय सुविधा नहीं दी गई। युवकों के लौटने की खबर मिलते ही परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई है। उन्होंने उनकी सकुशल वापसी के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का आभार जताया है।
तीनों युवकों ने बताया कि उनके पासपोर्ट अभी भी कंपनी मालिक के पास हैं। उन्हें भारतीय दूतावास ने तत्काल पासपोर्ट बनाकर सऊदी से हैदराबाद भेजा। वहां से घर तक पहुंचने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं।
वह हैदराबाद में किसी से उधार लेकर रुपये का जुगाड़ कर रहे हैं। जेल में भी उनके साथ पशुओं जैसा व्यवहार किया गया। उन्हें एक कमरे में भेड़-बकरियों की तरह ठूंस कर रखा गया।