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2022 से पहले प्राकृतिक कृषि राज्य बनेगा हिमाचल: देवव्रत

Wed, 03 Jul 2019 10:56 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन Published by: Krishan Singh Updated Wed, 03 Jul 2019 10:56 PM IST
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Himachal will become natural agriculture state before 2022: Devvrat
सोलन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल आचार्य देवव्रत - फोटो : अमर उजाला

प्राकृतिक कृषि खुशहाल किसान योजना के तहत सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती में डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विवि नौणी में छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। समापन समारोह की अध्यक्षता उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने की।

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विशिष्ट अतिथि राज्यपाल आचार्य देवव्रत और नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार थे। छह दिवसीय शिविर में प्रशिक्षक के तौर पर पद्मश्री सुभाष पालेकर उपस्थित रहे।
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आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक कृषि पद्धति को देश स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए शिविर में आने पर उत्तराखंड की राज्यपाल और नीति आयोग के उपाध्यक्ष का आभार जताया। कहा कि पिछले वर्ष 500 किसानों को इस पद्धति से जोड़ने का लक्ष्य रखा था, जबकि पौने तीन हजार किसान इससे जुड़े।
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इस वर्ष 50 हजार किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। शिविर के आयोजन से करीब 1000 किसान प्रशिक्षक बनकर जाएंगे। ये ग्राम स्तर पर प्रचार करेंगे। उम्मीद जताई कि वर्ष 2022 से पहले हिमाचल प्राकृतिक कृषि राज्य बन जाएगा।

शिविर में प्रदेश के करीब 1000 किसानों-बागवानों ने भाग लिया। सुभाष पालेकर का राज्य में चौथा शिविर है। मुख्यातिथि राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल दोनों हिमालयी राज्य हैं।

इनकी एक जैसी भौगोलिक परिस्थितियां हैं। पर्वतीय राज्यों के पर्यावरण, वन, नदी-जल संपदा को रासायनिक पदार्थों से बचाते हुए, प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देना समय की मांग है। 

प्राकृतिक खेती से संबंधित संयुक्त मंच की जरूरत

प्राकृतिक कृषि परियोजना निदेशक राकेश कंवर ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। सुभाष पालेकर प्राकृतिक कृषि की दिशा में कार्य कर रहे हैं। जीएनजी एग्रीटेके एंड वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुरेंद्र कुमार अग्रवाल, लारजेस्ट एग्रो रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष नितिश नरूला ने भी किसानों को संबोधित किया। 

शिविर में सुझाव दिया गया कि विशेषज्ञों को हिमालयी राज्यों के लिए प्राकृतिक खेती से संबंधित एक संयुक्त मंच की स्थापना के प्रयास करने चाहिए। मुख्यातिथि राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि प्राकृतिक खेती के इन अनुभवों के आधार पर वह उत्तराखंड में प्राकृतिक कृषि को लागू करने व इसके विस्तार के लिए प्रयास करेंगी। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डा. राजीव कुमार ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री के आह्वान को पूरा करने के लिए हम हर स्तर पर प्रयासरत है। 

पर्यटन, फल उत्पादन पहाड़ी राज्यों की विशेष पहचान 
पद्मश्री सुभाष पालेकर ने खुशी जताई कि नीति आयोग और राज्यपाल इस तरह के किसान प्रशिक्षण शिविर में भाग ले रहे हैं। पर्यटन और फल उत्पादन पहाड़ी राज्यों की विशेष पहचान है। ऐसे मॉडल गांव विकसित किए जाने चाहिए, जहां पूर्ण रूप से प्राकृतिक कृषि की जाती है। इससे पर्यटक आकर्षित होंगे और उन्हें प्राकृतिक उत्पाद मिल सकेंगे।

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