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Himachal: हिमाचल फिर उठाएगा लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के कब्जे का मामला, बैठक के लिए भेजा प्रस्ताव

Sat, 06 Jan 2024 11:41 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 06 Jan 2024 11:41 AM IST
सार

स्पीति में लद्दाख और चंबा में जम्मू-कश्मीर ने किया अवैध तौर पर कब्जा किया हुआ है। केंद्र सरकार के समक्ष भी बीते कई वर्षों से इस मामले को राज्य सरकार उठाती रही है लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला है। 

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Himachal will again raise the issue of occupation of Ladakh and Jammu and Kashmir, proposal sent for meeting
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की सीमा में लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के कब्जे का मामला अब उच्च स्तरीय बैठक में गूंजेगा। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने दोनों केंद्र शासित राज्यों के उच्च अधिकारियों को बैठक के लिए प्रस्ताव भेजा है। स्पीति में लद्दाख और चंबा में जम्मू-कश्मीर ने किया अवैध तौर पर कब्जा किया हुआ है। केंद्र सरकार के समक्ष भी बीते कई वर्षों से इस मामले को राज्य सरकार उठाती रही है लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला है। अब राज्य सरकार से दोनों केंद्र शासित राज्यों के साथ दोबारा चर्चा करने की योजना बनाई है।

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शुक्रवार को राज्य सचिवालय में मीडिया से बातचीत में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि पिछले कई वर्ष से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोग हिमाचल की सीमाओं में प्रवेश कर कब्जे कर रहे हैं। चंबा जिले में जम्मू-कश्मीर से लगते चुराह में कब्जे किए गए हैं जबकि लाहुल-स्पीति जिले के सरचू में लद्दाख के लोगों ने कब्जे किए हैं। इन मामलों को हल करने के लिए दोनों राज्यों के अधिकारियों से बैठक करने की तैयारी है। बता दें कि हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की सीमा के भीतर जम्मू-कश्मीर ने 10 किलोमीटर सड़क का निर्माण कर दिया है। वर्ष 2021 में भी हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के सीमांत क्षेत्र को लेकर चंबा प्रशासन और डोडा प्रशासन आमने-सामने आ चुका है।
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इस दौरान बाकायदा खुंडी मराल में दोनों जिलों के अधिकारियों की बैठक भी हुई। हिमाचल ने सीमावर्ती क्षेत्र पधरी जोत को चंबा के सलूणी उपमंडल का हिस्सा होने का दावा किया है। डोडा प्रशासन के समक्ष 1854 से पहले के दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं, जिस पर डोडा प्रशासन कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाया। मनाली-लेह मार्ग स्थित हिमाचल की सीमा सरचू का विवाद भी बीते कई वर्षों से सुलझ नहीं सका है। सरचू में लद्दाख के अस्थायी कारोबारियों पर हिमाचल की सीमा में आकर कारोबार करने का आरोप है। हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रदेश और लेह-लद्दाख के सीमा विवाद का मामला गूंजा था। लाहौल-स्पीति के विधायक रवि ठाकुर ने कहा था कि लेह-लद्दाख शिंकुला में 35 किलोमीटर और सारचू में 14 किलोमीटर में हिमाचल की सीमा में अतिक्रमण कर चुका है। ऐसे में इन मामलों को लेकर अब प्रदेश ने कड़ा रुख अपनाने का फैसला लिया है।
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हाटी मामले में मान्य होगा हाईकोर्ट का अंतिम फैसला : नेगी
 जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा है कि हाटी के मामले पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का अंतिम फैसला मान्य होगा। अभी मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसको लेकर किसी भी प्रकार की टिप्पणी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने भारत सरकार से हाटी को जनजातीय दर्जा देने के मामले में कुछ स्पष्टीकरण मांगे थे। भारत सरकार से जवाब आने के तुरंत बाद प्रदेश सरकार ने जनजातीय का दर्जा देने की अधिसूचना जारी कर दी थी। 

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