मौसम: हिमाचल में चार साल बाद 20 दिन पहले ही 10 डिग्री तक चढ़ा पारा, गुठलीदार फलों पर पड़ रही मार
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पॉल ने बताया कि प्रदेश में इस वर्ष गर्मी की शुरुआत समय से पहले हो गई है। 20 अप्रैल तक प्रदेश में पारा चढ़ना शुरू होता था। मैदानी जिलों में लू चल रही है। शिमला-मनाली में पसीने छूटने लगे हैं।
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हिमाचल प्रदेश में चार साल बाद 20 दिन पहले ही दस डिग्री तक अधिकतम तापमान चढ़ गया है। वर्ष 2018 में पड़ी गर्मी जैसे हालात इस बार भी बनने लगे हैं। आमतौर पर 20 अप्रैल के आसपास पड़ने वाली गर्मी मार्च के अंत में ही शुरू हो गई है। मैदानी जिलों में लू चल रही है। शिमला-मनाली में पसीने छूटने लगे हैं। कई दिनों से बारिश न होने से गुठलीदार फलों पर गर्म मौसम की मार पड़ने के साथ ही फलों की ड्रॉपिंग की समस्या खड़ी हो गई है। गुठलीदार फलों के पेड़ों पर पहले बारिश से फूल झड़े और अब बची फसल पर सूखे की मार से फल झड़ने लगे हैं। लगातार तापमान बढ़ने से बादाम, खुमानी, आड़ू और प्लम की फसल की गुणवत्ता और आकार प्रभावित हुआ है।
फल उत्पादकों को सुझाव दिया जा रहा है कि बागवानी विशेषज्ञों की सलाह लेकर बगीचों की नमी बचाएं। शिमला के रामपुर क्षेत्र और आसपास के फल उत्पादक सोनू गरोल, राधा कृष्ण कायथ, रविंद्र सिंह, हेमराज, हर्ष कुमार, सरस्वती ठाकुर, योग राज, राकेश कुमार, अनिल और रणवीर चौहान बताते हैं कि पहले बारिश से गुठलीदार फलों के पेड़ों से फूल झड़ गए थे, अब फलों का आकार बढ़ने का समय है तो फल झड़ने की समस्या खड़ी हो गई है।
बारिश न हुई तो फलों की ड्रॉपिंग होगी तेज
राज्य के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने बताया कि समय रहते बारिश न हुई तो गुठलीदार फलों के झड़ने की समस्या तेजी से बढ़ेगी। जिन इलाकों में बर्फबारी कम हुई है, वहां के बगीचों में नमी तेजी से कम हो रही है। गुठलीदार फसलों की सेटिंग के बाद बगीचों में तौलियों में नमी बनाए रखने के लिए घास और प्लास्टिक से मल्चिंग कर लें।
सेब के नए पौधे सूखने का खतरा
सर्दी में हुई अच्छी बर्फबारी के बाद इस साल बड़े पैमाने पर बागवानों ने सेब के नए पौधे लगाए हैं। हाई डेंसिटी प्लांटेशन (एचडीपी) के लिए बागवानों ने विदेशों से आयात कर बगीचों में पौधे लगाए हैं, लेकिन बारिश न होने से इन पौधों के सूखने का खतरा पैदा हो गया है।
ऊना में गेहूं, कुल्लू, सोलन, रामपुर में नकदी फसलों पर संकट
ऊना जिले में बारिश न होने से करीब 30 प्रतिशत गेहूं की फसल सूखने के कगार पर है। जिला की 70 प्रतिशत जमीन पर सिंचाई की सुविधा नहीं है। वहीं, सोलन जिले में गोभी, मटर, गेहूं, लहसुन आदि नकदी फसलें मुरझाने लगी हैं। टमाटर और शिमला मिर्च को भी नुकसान हो रहा है। कुल्लू जिले में हरे मटर की 40 फीसदी फसल बर्बाद हो गई है। जिले में 2500 हेक्टेयर भूमि पर मटर का उत्पादन होता है। शिमला जिले के रामपुर क्षेत्र में स्टोन फ्रूट प्लम, बादाम, खुमानी, आडू़, शकरपारा और चूली की फसल अपेक्षा से काफी कम होने के आसार हैं। उधर, जिला कांगड़ा में बढ़ती गर्मी सेे किसानों में फसल सूखने की चिंता बढ़ गई है। हालांकि जिला कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. राहुल कटोच ने बताया कि गर्मी से जिले में फसलोें को कोई नुकसान नहीं हुआ है। बिलासपुर जिले में भी गेहूं और जौ की फसल पर संकट मंडरा रहा है।
15 अप्रैल के बाद जल स्रोतों में पड़ेगा संकट
तापमान यूं ही बढ़ता रहा तो 15 अप्रैल के बाद जल स्रोतों के सूखने का संकट खड़ा हो जाएगा। सूखे की स्थिति बनी रहती है तो जल शक्ति विभाग के 18 हजार कर्मचारियों को फील्ड में तैनात कर दिया जाएगा। जलशक्ति विभाग के इंजीनियर इन चीफ संजीव कौल ने कहा कि प्रदेश में सूखे की स्थिति पर बराबर रिपोर्ट मांगी जा रही है। ब्यूरो
मैदानी जिलों में चल रही लू, शिमला-मनाली में छूटने लगे पसीने
हिमाचल प्रदेश के मैदानी जिलों में इन दिन लू चल रही है। शिमला-मनाली में पसीने छूटने लगे हैं। 3 अप्रैल तक प्रदेश में मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान है। इस दौरान पारा और चढ़ने के आसार हैं।राजधानी शिमला सहित प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में बुधवार को धूप खिली। 10 क्षेत्रों का अधिकतम पारा 30 डिग्री पार हो गया है। रात के तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
मंगलवार रात को नाहन में न्यूनतम तापमान 19.3, चंबा में 17.0, शिमला में 15.8, बिलासपुर में 15.5, कांगड़ा में 15.0, ऊना में 14.5, हमीरपुर में 14.3, धर्मशाला में 12.2, सोलन में 11.6, मनाली में 8.2, कल्पा में 5.4 और केलांग में 1.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पॉल ने बताया कि प्रदेश में इस वर्ष गर्मी की शुरुआत समय से पहले हो गई है। 20 अप्रैल तक प्रदेश में पारा चढ़ना शुरू होता था। इन दिनों ही अधिकतम तापमान में सामान्य से 10 डिग्री की बढ़ोतरी हो गई है।
अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस में)
ऊना 38.7
बिलासपुर 35.3
कांगड़ा 34.8
हमीरपुर 34.5
सुंदरनगर 34.3
नाहन 33.3
सोलन-चंबा 33.0
धर्मशाला 32.8
शिमला 25.4
केलांग 17.0