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Himachal Rain: किन्नौर में फटा बादल, भूस्खलन से आनी में महिला की माैत; राज्य में 914 सड़कें बंद, देखें वीडियो

Fri, 29 Aug 2025 11:20 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 29 Aug 2025 11:20 AM IST
सार

प्रदेश में मानसून की बारिश का कहर लगातार जारी है। लगातार जारी बारिश से जगह-जगह भूस्खलन, बाढ़ से लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। 

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Himachal weather forecast: Rain Cloud burst in Kinnaur, landslide on Kiratpur-Manali four lane, schools closed
किन्नाैर में बादल फटा, आनी में भूस्खलन से दो महिलाएं लापता, चंबा में सड़क गायब। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश का कहर लगातार जारी है। लगातार जारी बारिश से जगह-जगह भूस्खलन, बाढ़ से लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। जनजातीय जिले किन्नौर के लिप्पा में शुक्रवार सुबह बादल फटने के कारण व्यापक नुकसान की सूचना है। बादल फटने से सेब के फलदार पौधों सहित मकानों को नुकसान हुआ है। बादल फटने के बाद दो मजदूर मलबे में फंस गए थे जिन्हें ग्रामीणों ने सुरक्षित बचा लिया। दोनों को उपचार के लिए रिकांगपिओ अस्पताल में भर्ती किया गया। 

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आनी में भूस्खलन की चपेट में आए तीन मकान, दो महिलाएं लापता
उधर, आनी के लोअर पटारना गांव में तीन मकान भूस्खलन की चपेट में आ गए। मकान में रह रही दो महिलाएं भी मलबे में दब गईं। बाद में एक का शव बरामद कर लिया गया लेकिन एक अन्य महिला अभी भी लापता है। भूस्खलन की चपेट में कुछ मवेशी भी आए हैं। राहत व बचाव कार्य जारी है। अधिकतर ग्रामीण सड़कें भूस्खलन से ठप हो गई हैं।  खादवी गांव में भी तीन मकान भूस्खलन की चपेट में आए। वहीं रामपुर बुशैहर के पशाड़ा खड्ड के पास पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण एक वाहन क्षतिग्रस्त हुआ है। 

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राज्य में भूस्खलन से 635 सड़कें बंद, 1,333 बिजली ट्रांसफार्मर बाधित
राज्य में शुक्रवार रात 10:00 बजे तक भूस्खलन से दो नेशनल हाईवे सहित 914 सड़कें बंद रहीं। 925 बिजली ट्रांसफार्मर व 266 जल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हैं। मंडी, कुल्लू, चंबा व कांगड़ा जिले में सबसे अधिक सड़कें बंद हैं। उधर, लगातार पांच दिनों से बंद पड़ा किरतपुर-मनाली फोरलेन आखिरकार शुक्रवार सुबह लगभग 11:00 बजे बहाल कर दिया गया। पंडोह डेम, कैंची मोड़ और बनाला के पास रास्ता खोलने के बाद अब बड़ी और छोटी गाड़ियों को निकाला जा रहा है। गौरतलब है कि बीते दिनों दोनों जगह भूस्खलन के कारण हालात बेहद खराब थे। कैंची मोड़ पर फोरलेन का बड़ा हिस्सा धंस गया था और लगातार गिरते पत्थरों की वजह से बहाली कार्य शुरू करना जोखिम भरा साबित हो रहा था। साथ ही बनाला के पास फोरलेन पर बड़ा भूस्खलन होने से आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई थी। बीती रात को भी बारिश के चलते फिर इन दोनों स्थानों पर पत्थर गिरे। लेकिन जैसे ही सुबह मौसम ने थोड़ी राहत दी, प्रशासन और एनएचएआई की टीमों ने मलबा हटाने का काम शुरू किया और आखिरकार सुबह 11:00 बजे के करीब दोनों जगहों पर रास्ता खोल दिया गया।

आज इन जिलों में स्कूल बंद
जिला सिरमौर में भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा ने आज सभी शिक्षण संस्थानों में अवकाश घोषित करने के आदेश जारी किए हैं। वहीं कुल्लू जिला के मनाली उपमंडल में भी आज सभी शिक्षण संस्थान बंद हैं। जबकि कुल्लू उपमंडल में नाै स्कूल बंद हैं। उपायुक्त कुल्लू ने इसकी अधिसूचना जारी की है। चंबा जिले में भी शिक्षण संस्थान आज बंद हैं। 

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भरमौर-पठानकोट हाईवे रजेरा तक बहाल, मणिमहेश यात्रा का रास्ता हुआ खतरनाक
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी चंबा दाैरे पर हैं। उन्होंने आपदा में हुए नुकसान का जायजा लिया। वहीं भरमौर-पठानकोट हाईवे रजेरा तक बहाल हो गया है। आपदा के पांचवें दिन जिला मुख्यालय तक हुआ हाईवे बहाल होने से बड़ी राहत मिली है। वहीं मणिमहेश श्रद्धालुओं को पठानकोट तक पहुंचाने के लिए एचआरटीसी की 10 बसें जगह-जगह खड़ी हैं। वहीं मणिमहेश यात्रा का रास्ता खतरनाक हो गया है। रास्ते में जगह-जगह माैजूद नाले उफान पर हैं। मोबाइल सेवाएं बहाल होने के बाद अब तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं। 

नौ मणिमहेश यात्री अभी लापता
भारी बारिश-भूस्खलन से तबाही के बीच 24 से 27 अगस्त तक सात मणिमहेश यात्रियों की मौत हो गई है। हड़सर से ऊपर भूस्खलन होने से जानें गई हैं। आठ श्रद्धालु घायल हो गए हैं, जबकि नौ अभी भी लापता हैं। मणिमहेश यात्रा पर गए करीब 8,000 श्रद्धालु अभी भी रास्ते में फंसे हैं। प्रशासन ने 3,457 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है। भरमौर से आगे का संपर्क पूरी तरह कट गया है। हालात खराब हैं। रास्ते में फंसे श्रद्धालुओं को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। 

पहाड़ी से गिरे मलबे की चपेट में आई सब्जी से भरी पिकअप
 सोलन-जौनाजी मार्ग पर दामकड़ी के समीप पहाड़ी से मलबा गिर गया। इसकी चपेट में सब्जी मंडी के लिए सब्जी लेकर जा रही एक पिकअप आ गई। हालांकि, इसमें कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। मलबा गिरने के कारण पिकअप सड़क से बाहर निकल गई। इसके बाद रस्सी से बांधकर पिकअप को खाई में गिरने से रोका गया। इस मार्ग पर कई जगह मलबा गिरा है।

कई भागों में 4 सितंबर तक जारी रहेगा का बारिश का दाैर, इन जिलों में तीन भारी बारिश का अलर्ट
माैसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से राज्य के कई भागों में 4 सितंबर तक बारिश का दाैर जारी रहने का पूर्वानुमान जताया गया है। 29 से 31 अगस्त तक कांगड़ा, ऊना, चंबा, कुल्लू, मंडी व सिरमाैर जिले में अलग- अलग दिन भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। 1 व 2 सितंबर के लिए कुछ स्थानों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं बीती रात को जटोन बैराज  में 138.0, पालमपुर 91.4, संधोल 77.8 , पांवटा साहिब 75.0, कसौली 62.0, नाहन 60.8, सोलन 57.8, गोहर 55.6, बिलासपुर 50.4, मुरारी देवी 48.4, नगरोटा सूरियां 48.2 व काहू में 45.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

लाहौल की ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी, बर्फ से सफेद हुईं पहाड़ियां
 दो दिन बारिश थमने के बाद कुल्लू-लाहाैल में शुक्रवार को माैसम ने फिर से करवट बदली। कुल्लू में सुबह से रुक-रुक कर बारिश हो रही है जबकि लाहौल की ऊंची चोटियों में बर्फबारी हुई है। इससे घाटी की पहाड़ियां सफेद हो गई हैं। बर्फ गिरने से ठंड भी बढ़ने लगी है। रोहतांग दर्रा के साथ शिंकुला व कुंजम दर्रा में भी फाहे गिर रहे हैं।

मानसून में अब तक 312 लोगों  की माैत
 प्रदेश में जारी बारिश के बीच मानसून सीजन के दौरान अभी तक कुल 2,75,354.81 लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। प्रदेश में इस मानसून सीजन में 20 जून से 28 अगस्त तक 312 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 374 लोग घायल हुए हैं। 38 लोग अभी लापता हैं। इस दौरान 152 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई है। बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़ से अब तक 4,221 कच्चे-पक्के घरों, दुकानों को क्षति हुई है। 3,367 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। 1,854 पालतु पशुओं की मौत हुई है।

सोलन-बड़ोग, शिल्ली सड़क पर भूस्खलन
 सोलन-बड़ोग सड़क पर पंचपरमेश्वर मंदिर के समीप सड़क पर पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मलबा गिर गया। इस कारण सड़क पर आवाजाही बंद हो गई। बड़ोग को जाने के लिए लोगों को छह किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। वहीं सोलन शहर की शिल्ली सड़क पर उपायुक्त आवास के पास भूस्खलन हुआ है। इस कारण सड़क भी बंद हो गई। भूस्खलन से कई मकानों को भी खतरा हो गया है। गुरुवार रात हुई बारिश के बाद सड़क पर अधिक मात्रा में मलबा आया है।

कोकसर के डिंफुक गांव के ऊपर दरकी पहाड़ी, जान बचाकर भागे ग्रामीण
 जनजातीय क्षेत्र लाहौल के कोकसर के डिंफुक गांव में पहाड़ से बड़े-बड़े पत्थर व मलबा आ गया। इससे पहाड़ी के नीचे माैजूद गांव के लोगों में दहशत मच गई।  घटना 26 अगस्त शाम की है, लेकिन घाटी में पिछले पांच दिनों से बिजली, दूरसंचार व इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से बंद हैं। अब क्षेत्र में हुई तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं जो सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं। 

अचानक टूटी चट्टान, पेड़ों को उखाड़ते हुए बागन गांव की ओर बढ़ी, मची चीख-पुकार
 हिमाचल प्रदेश की लगघाटी के बागन गांव में भूस्खलन के कारण करीब 40 घरों के ढहने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीण घरों को छोड़ विद्यालय और रिश्तेदारों के वहां रहने को मजबूर हैं। घरों में दरारें आई हुई हैं और गांव के पीछे से चट्टानें खिसक रहीं हैं। इस वजह से घरों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है।  शुकव्रार की सुबह भी एकाएक एक चट्टान खिसककर गांव की ओर आई। गनीमत रही कि चट्टान एकाएक दो हिस्सों में टूट गई, जिससे उसकी रफ्तार थमी और जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, इस घटना से ग्रामीण दहशत में हैं और प्रशासन से राहत और बचाव की मांग कर रहे हैं।

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