हिमाचल: सीएम सुक्खू बोले- किसी भी संधि का उल्लंघन नहीं है वाटर सेस लगाना
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को विधानसभा सदन में कहा कि हिमाचल प्रदेश अपने पड़ोसी राज्यों को सम्मान देते हुए कहना चाहता है कि प्रदेश में सरकार की ओर से वाटर सेस ऑन हाइड्रो पावर जनरेशन एक्ट 2023 को लागू किया है, जो किसी भी प्रकार की संधियों का उल्लंघन नहीं करता है।
विस्तार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपने पड़ोसी राज्यों को सम्मान देते हुए कहना चाहता है कि राज्य सरकार की ओर से वाटर सेस ऑन हाइड्रो पॉवर जनरेशन एक्ट 2023 को लागू किया है, जो किसी भी प्रकार की संधियों का उल्लंघन नहीं करता है। न ही यह सिंधु जल संधि के प्रावधानों का ही उल्लंघन करता है। पंजाब और हरियाणा सरकार का यह कहना कि हिमाचल सरकार का जल उपकर लगाने का फैसला अंतरराज्यीय जल विवाद अधिनियम के खिलाफ है, यह तर्कसंगत नहीं है। इसमें पड़ोसी राज्यों को छोड़े जाने वाले पानी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इस अधिनियम का कोई भी प्रावधान पड़ोसी राज्यों के जल अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है। सुक्खू ने सदन में वक्तव्य दिया कि पंजाब सरकार का यह कहना कि हिमाचल सरकार का यह कदम गैर कानूनी है, यह तर्कसंगत नहीं है।
हिमाचल वाटर सेस लगाने वाला पहला राज्य नहीं
प्रदेश सरकार ने अपने राज्यों में स्थापित जलविद्युत परियोजनाओं से उपयोग में लाए जाने वाले जल पर उपकर लगाया है, न कि पड़ोसी राज्यों में बहने वाले पानी पर इसे लगाया गया है। यह भी बताना जरूरी है कि हिमाचल प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य नहीं है, जिसने परियोजनाओं के उपयोग में आने वाले जल पर उपकर लगाया है। इससे पहले पड़ोसी राज्य उत्तराखंड ने 2013 और जम्मू-कश्मीर ने पहले ही वाटर सेस एक्ट लागू कर दिया है। इससे राज्य को आमदनी मिल रही है। यह कहना भी गलत है कि राज्य को अपने जल स्रोतों पर वाटर सेस लगाने का अधिकार नहीं है। सांविधानिक प्रावधान के अनुसार भी पानी राज्य का विषय है।
जल संसाधनों पर भी राज्य का अधिकार
इसके जल संसाधनों पर भी राज्य का अधिकार है। हिमाचल प्रदेश सिंधु जल संधि 1960 को मान्यता देता है। हिमाचल जल विद्युत उत्पादन अधिनियम 2023 का भी उल्लंघन नहीं करता है। यह अंतरराज्यीय नदी विवाद के खिलाफ भी नहीं है। जहां तक भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड का संबंध है, इसकी स्थापना पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के प्रावधानों के अनुसार भाखड़ा नंगल परियोजना के प्रशासन, रखरखाव और संचालन के लिए की गई है। यह राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और चंडीगढ़ राज्यों का उपक्रम है, इसलिए बीबीएमबी की परियोजनाओं में हिमाचल सरकार की ओर से लगाए गए जल उपकर का भार हिमाचल सहित पांच राज्यों में समान रूप से वितरित किया जाएगा। राज्य को पानी के उपयोग पर उपकर लगाने का पूरा अधिकारी है।
बीबीएमबी ने स्थानीय आबादी को उन्हीं के हाल पर छोड़ दिया
सुक्खू ने कहा कि पॉवर जनरेशन पर जल उपकर लगाना राज्य के अधिकार क्षेत्र के तहत आता है। वह यह भी कहना चाहते हैं कि बीबीएमबी के तीन जलाशयों से प्रदेश की 45 हजार हेक्टेयर भूमि जलमग्न हो गई है। हिमाचल में इन परियोजनाओं से बने जलाशयों से राज्य पर तो कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। बीबीएमबी की किसी भी परियोजना ने इसके लिए जरूरी कदम नहीं उठाए हैं। स्थानीय आबादी को उन्हीं के हाल पर छोड़ दिया गया है। इन जलाशयों ने न सिर्फ कृषि और बागवारी की भूमि निगली है, बल्कि यातायात के साधन भी बाधित किए हैं।
ये भी पढ़ें: हिमाचल विधानसभा सत्र: सत्तापक्ष के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने वेल में पहुंचकर की नारेबाजी, फिर वाकआउट