राष्ट्रीयकृत बैंकों से कर्ज ले सकेंगे जनजातीय क्षेत्रों के लोग, बिल पारित
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जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को बैंकों से ऋण लेने की सुविधा देने के लिए जमीन गिरवी रखने देने का बिल वीरवार को सदन में ध्वनिमत से पारित हो गया। अल्पकालिक चर्चा के बाद इस विधेयक का सत्ता पक्ष ने ही नहीं बल्कि विपक्ष के एक विधायक ने भी समर्थन किया। हां में हां मिलाते हुए यह विधेयक सदन में भोजनावकाश से पहले पारित कर दिया गया।
अब तक हिमाचल में यह व्यवस्था रही है कि जनजातीय क्षेत्रों के लोग केवल सहकारी बैंकों से ही कर्ज ले पाते थे, मगर अब वे राष्ट्रीयकृत बैंकों के पास जमीन मोर्टगेज करके भी कर्ज ले पाएंगे। इस बिल के पारण का प्रस्ताव रखते हुए जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि इससे इन क्षेत्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो रही है।
कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने किया समर्थन
नादौन से कांग्रेस के विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस बिल को पारित करने से पहले इसमें कुछ खामियों को दूर किया जाए। यह बात स्पष्ट होनी चाहिए कि क्या भारत के संविधान की अनुसूची 5 और 6 को ध्यान में रखकर इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि जमीन की नीलामी में क्या बाहर के लोग हिस्सा ले सकते हैं कि नहीं।
जब जनजातीय क्षेत्रों में बाहरी लोगों को जमीन खरीदने का अधिकार नहीं है तो यह बात उठती है। इस पर किन्नौर के कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि यह दूसरा मसला है। यह बिल अच्छा है। वह इसका समर्थन करते हैं। इससे जनजातीय क्षेत्र के लोगों को राष्ट्रीयकृत बैंकों से कर्ज लेने का मौका मिलेगा।