हिमाचल: खनन पट्टे की लीज और कंपनी के हस्तांतरण पर देना होगा स्टांप शुल्क, विधानसभा में तीन विधेयक पेश
शुक्रवार को राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने सदन में भारतीय स्टांप (हिमाचल प्रदेश द्वितीय संशोधन) अधिनियम 2023 विधेयक पेश किया। नेगी ने कहा कि अब तक इस अधिनियम में कंपनियों की ओर से संपत्ति के हस्तांतरण पर स्टांप शुल्क लगाने का प्रावधान नहीं था, जिसकी वजह से कई मुकदमे सामने आते रहे हैं।
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को तीन विधेयक प्रस्तुत किए गए। हिमाचल प्रदेश में पहली बार खनन पट्टे की लीज और कंपनी हस्तांतरण पर स्टांप शुल्क का भुगतान करना होगा। शुक्रवार को राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने सदन में भारतीय स्टांप (हिमाचल प्रदेश द्वितीय संशोधन) अधिनियम 2023 विधेयक पेश किया। नेगी ने कहा कि अब तक इस अधिनियम में कंपनियों की ओर से संपत्ति के हस्तांतरण पर स्टांप शुल्क लगाने का प्रावधान नहीं था, जिसकी वजह से कई मुकदमे सामने आते रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार की ओर से दूसरा संशोधन विधेयक लाया गया है, क्योंकि भारतीय स्टांप अधिनियम की अनुसूची-1 ए में इसके लिए प्रावधान करना आवश्यक है। साथ ही खनन पट्टे की लीज पर भी स्टांप शुल्क लगाने का प्रावधान किया है। कंपनी हस्तांतरण पर स्टांप शुल्क बाजार मूल्य का 8 फीसदी और खनन पट्टे पर बाजार मूल्य या वार्षिक रॉयल्टी का 6 फीसदी स्टांप शुल्क लगाना प्रस्तावित किया गया है।
पर्यावरण के लिए हानिकारक कचरा खुले में डालना होगा अपराध
मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में उपमुख्यमंत्री ने सदन में हिमाचल प्रदेश नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरा (नियंत्रण) संशोधन अधिनियम 2023 पेश किया। बिल में पर्यावरण के लिए हानिकारक नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरा सार्वजनिक नालियों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर खुले में फेंकना या जमा करने पर नियंत्रण करना है। गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्री की परिभाषा में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो।
जल उपकर आयोग का नाम अब जल आयोग होगा
हिमाचल प्रदेश में अब जल उपकर आयोग का नाम बदलकर जल आयोग होगा। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने शुक्रवार को तपोवन विधानसभा में हिमाचल प्रदेश जल विद्युत उत्पादन पर जल उपकर संशोधित विधेयक सभा पटल पर रखा है। इस संशोधित विधेयक के तहत पानी से संबंधित कई मुद्दे हैं, जो जल आयोग के अधीन लाए जाएंगे। भाजपा विधायक शनिवार को इस विधेयक पर चर्चा मांग सकते हैं। ऊर्जा मंत्रालय ने 25 अक्तूबर को पत्र जारी कर वाटर सेस को अवैध बताया था और इस पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। हिमाचल प्रदेश में 173 जल विद्युत परियोजनाएं हैं। अधिकांश कंपनियां वाटर सेस नहीं दे रही है। सुक्खू सरकार ने सत्ता संभालते ही जलविद्युत परियोजनाओं पर वाटर सेस लगाने का निर्णय लिया था। उल्लेखनीय है कि ऊर्जा मंत्रालय ने संविधान का हवाला देते हुए बिजली उत्पादन पर वाटर सेस व अन्य शुल्क लगाने को राज्य के क्षेत्राधिकार से बाहर बताया है। प्रदेश सरकार ने मानसून सत्र में विधानसभा में वाटर सेस को लेकर विधेयक पारित कर राज्य जल उपकर आयोग स्थापित किया था।