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हिमाचल: मंत्री-विधायकों का 24%, निगम-बोर्डों के अध्यक्षों का पांच गुना बढ़ा वेतन, सलाहकारों को भी लाखों

Tue, 10 Feb 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 10 Feb 2026 05:00 AM IST
सार

कर्मचारियों-पेंशनरों के वित्तीय लाभ रोकने की संस्तुति करने वाला वित्त विभाग मंत्री-विधायकों, निगम-बोर्डों के ओहदेदारों और सरकार के सलाहकारों के करोड़ों के खर्च पर खामोश है।

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Himachal: Salaries of ministers, MLAs increased, corporations boards chairpersons of get a five fold increase
प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधारने की संस्तुति। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधारने के लिए आम लोगों की सब्सिडी और नई भर्तियां बंद करने के साथ कर्मचारियों-पेंशनरों के वित्तीय लाभ रोकने की संस्तुति करने वाला वित्त विभाग मंत्री-विधायकों, निगम-बोर्डों के ओहदेदारों और सरकार के सलाहकारों के करोड़ों के खर्च पर खामोश है। पिछले एक साल के दौरान मंत्री-विधायकों के वेतन-भत्तों में 24 फीसदी बढ़ोतरी हो चुकी है। निगमों-बोडों के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों का मानदेय पांच गुना बढ़ा दिया गया है। राज्य सरकार के सलाहकारों-ओएसडी की भी लाखों में पगार है। लेकिन प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर प्रधान सचिव वित्त की ओर से सार्वजनिक तौर दी गई प्रेजेंटेशन में इस सियासी खर्चे का जिक्र तक नहीं किया गया। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आम लोगों को कड़े फैसलों के लिए आगाह कर रही सरकार इन खर्चों पर मौन है। इन दोहरे मापदंडों पर विशेषज्ञों के साथ आम लोग भी सवाल उठा रहे हैं। केंद्रीय बजट में राज्यों के लिए राजस्व घाटा अनुदान खत्म होने को सरकार आर्थिक विपदा करार दे रही है, लेकिन सियासी ओहदेदारों के बढ़ते खर्चे पर कोई बात करने को तैयार नहीं है।

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पिछले बजट सत्र के आखिरी दिन सत्तापक्ष एवं विपक्ष के सुर में सुर मिलते ही मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन-भत्ते 24 फीसदी तक बढ़ गए थे। विधायकों को पौने तीन लाख, मंत्रियों को करीब तीन लाख और सीएम को लगभग सवा तीन लाख वेतन-भत्ते तय किए गए हैं। मंत्री-विधायकों के वेतन-भत्ते अब हर पांच साल बाद खुद ही बढ़ते रहेंगे, भविष्य के लिए इसकी व्यवस्था भी कर दी गई है। उधर, राज्य सरकार ने कुछ सलाहकारों और निगम-बोडों के ओहदेदारों को कैबिनेट रैंक दिया है। इन्हें मंत्रियों के समकक्ष वेतन-भत्ते दिए जा रहे हैं। निगमों-बोडों और अन्य स्वायत्त निकायों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष भी तीन दर्जन से ज्यादा हैं। इनमें से कुछ को पहले जहां 15 से 30 हजार मानदेय मिलता था। माैजूदा सरकार में इसे सवा लाख तक मासिक कर दिया गया है। गाड़ी व अन्य सुविधाएं अलग से हैं। 

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सलाहकारों को हर माह 2.50 लाख तक दे रही सरकार
हिमाचल की कांग्रेस सरकार अपने सलाहकारों पर हर महीने लाखों रुपये खर्च कर रही है। लाखों में पगार के साथ इन्हें घर और गाड़ी समेत कई सुविधाएं दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू को 2.50 लाख रुपये मासिक पगार मिल रही है। दैनिक भत्ता, यात्रा भत्ता, वाहन, चिकित्सा प्रतिपूर्ति भत्ते अलग से हैं। सीएम के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान को भी 2.50 लाख वेतन के अलावा, चिकित्सा प्रतिपूर्ति सुविधा, 20 हजार आवास भत्ता, यात्रा, दैनिक और वाहन भत्ता मिल रहा है। सीएम के ही एक अन्य सलाहकार (आधारभूत ढांचा) अनिल कपिल को 2,31,130 रुपये पगार, चिकित्सा प्रतिपूर्ति और वाहन भत्ते दिए जा रहे हैं।

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वित्तीय बदहाली के लिए नेता और अफसर दोनों जिम्मेवार:  चौहान
इस वित्तीय बदहाली के लिए नेता और अफसर दोनों जिम्मेवार हैं। वित्त विभाग इस बात पर खामोश है कि राजस्व व्यय कैसे कम किया जाए। सलाहकारों, बोर्डों-निगमों के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों की पगारें घटाने के सुझाव क्यों नहीं। -प्रदीप चौहान, पूर्व आर्थिक सलाहकार

प्रजातंत्र में कोई खास नहीं, पहले ही कर दिया था आगाह : श्रीधर
प्रजातंत्र में कोई भी खास नहीं होना चाहिए। उत्पादक और अनुत्पादक खचों की पहचान करने की जरूरत है। जो अनुत्पादक व्यय है, उसे घटाए जाने की जरूरत है। मैं एक साल पहले ही सरकार को इस स्थिति के लिए आगाह कर चुका हूं। - तरुण श्रीधर, पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी
 

75 से ज्यादा अतिरिक्त, उप और सहायक महाधिवक्ता
हिमाचल सरकार ने मुकदमों की पैरवी के लिए 75 से ज्यादा अतिरिक्त, उप और सहायक महाधिवक्ता नियुक्त किए हैं। अतिरिक्त महाधिवक्ता को करीब 1.35 लाख, उप महाधिवक्ता को 90 हजार और सहायक महाधिवक्ता को 67 हजार रुपये का मानदेय मिल रहा है। ये राजनीतिक नियुक्तियां हैं, जो वर्तमान सरकार के कार्यकाल तक रहेंगी।

जरूरत के हिसाब से की जाती हैं राजनीतिक नियुक्तियां: धर्माणी
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि राजनीतिक नियुक्तियां जरूरत के अनुसार की जाती हैं। यह पिछली सरकार के कार्यकाल में भी की गई थी। केंद्र ने राजस्व घाटा अनुदान को बंद कर हिमाचल के हाथ बांध दिए हैं। 6000 करोड़ रुपये के गैप को भरने के लिए हर वर्ग से सहयोग से जरूरत है। गैर जरूरी खचों को सरकार कम कर रही है। 

कॉस्ट कटिंग के लिए गरीब की जेब पर कैंची न चलाएं सरकार : जयराम
पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि हमारे समव में बोडों-निगमों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को 30 हजार तक दिए जाते थे। अब डेढ़ लाख कर दिया गया है। सरकार ने 90 डिप्टी, एडिशनल एडवोकेट जनरल लगाए हैं। सलाहकार अलग से हैं। कॉस्ट कटिंग के लिए गरीब की जेब पर सरकार कैंची न चलाएं। ऐसे विकल्प तलाशे जाएं, जिससे आम आदमी न प्रभावित हो।

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