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संकट : सेब के दाम गिरने से पटरी से उतर सकती है हिमाचल की अर्थव्यवस्था, सालाना होता है 5000 करोड़ का कारोबार

Thu, 26 Aug 2021 02:17 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 26 Aug 2021 02:17 AM IST
सार

 राज्य के सात जिलों का सेब विकास दर को थामकर हिमाचल प्रदेश की लाज बचाता आया है। ऐसे में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का भी रेट गिरने से चिंतित होना स्वाभाविक है। 

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Himachal's economy can be derailed due to falling apple prices, annual turnover of 5000 crores
हिमाचली सेब (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सेब के दाम गिरने से हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पटरी से बाहर उतर सकती है।  प्रदेश में सेब का करीब 5000 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार होता है। इससे बेरोजगारी भी बढ़ सकती है, क्योंकि प्रदेश में लाखों लोगों का घर इसी से चलता है। राज्य के सात जिलों का सेब विकास दर को थामकर हिमाचल प्रदेश की लाज बचाता आया है। ऐसे में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का भी रेट गिरने से चिंतित होना स्वाभाविक है।  प्रदेश में वर्तमान में सात जिलों के बागवान सेब उगा रहे हैं। सेब की सबसे ज्यादा लगभग 70 फीसदी फसल शिमला जिले में होती है। शिमला के बाद कुल्लू और किन्नौर सेब की पैदावार करने वाले अन्य प्रमुख जिले हैं।

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मंडी, सिरमौर, चंबा, कांगड़ा आदि जिलों के कुछ क्षेत्रों में भी सेब की पैदावार होने लगी है। ऐसे में यह फसल सात जिलों में हो रही हैं। देश की बात करें तो हिमाचल प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बाद दूसरा बड़ा सेब उत्पादक राज्य है। जम्मू-कश्मीर देश का करीब 70 फीसदी सेब उगाता है तो हिमाचल प्रदेश करीब 27 प्रतिशत ही उगा पाता है। बाकी सेब उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में उगाया जाता है।  मौजूदा वक्त में हिमाचल प्रदेश पर करीब 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इससे सरकारी क्षेत्र में रोजगार देने की रफ्तार को भी बहुत तेज नहीं किया जा पा रहा है। पिछले कुछ वक्त से पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं का भी सेब बागवानी की ओर रुझान बढ़ा, मगर अब सब निराश हो गए हैं। राज्य में एक लाख से ज्यादा परिवार तो सीधे तौर पर सेब बागवानी से जुडे़ हैं। सेब सीजन से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से लाखों लोगों को लाभ होता है। हर वर्ग की खरीद क्षमता बढ़ने से तमाम तरह के कारोबारियों का अच्छा व्यवसाय चलता है। 
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रेट अच्छे मिलते तो हिमाचल की विकास दर भी बढ़ती 
 वैश्विक मंदी से उपजे देशव्यापी आर्थिक संकट में सेब ने ही हिमाचल प्रदेश की लाज रखी है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में तो सेब की उपज नहीं बढ़ी होती तो यह दर पांच फीसदी से भी नीचे गिर जाती। इस बार आर्थिक वृद्धि दर गिरी जरूर है, लेकिन सेब ने इसे राष्ट्रीय आर्थिक विकास दर से नीचे नहीं लुढ़कने दिया। वित्त वर्ष 2019-20 में जहां देश की विकास दर 5.0 थी, वहीं हिमाचल प्रदेश की सेब की वजह से 5.6 फीसदी से नीचे नहीं लुढ़क पाई। हालांकि, पिछला वित्तीय वर्ष यानी 2020-21 सेब सीजन के लिहाज से ऑफ ईयर था तो उस वक्त को ज्यादा मदद नहीं मिल पाई, मगर चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 मेें फसल अच्छी होने के कारण इस बार प्राथमिक क्षेत्र में विकास दर के बढ़ने की बहुत उम्मीद थी, मगर मौजूदा स्थिति में ऐसा नहीं लग रहा है। 

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