{"_id":"614b62278ebc3efadd1c7e49","slug":"himachal-s-17-firms-and-horticulturist-are-getting-apple-and-cherry-plants-directly-from-abroad","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिमाचल की 17 फर्में और बागवान सीधे विदेशों से मंगवा रहे सेब-चेरी के पौधे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिमाचल की 17 फर्में और बागवान सीधे विदेशों से मंगवा रहे सेब-चेरी के पौधे
Thu, 23 Sep 2021 12:23 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 23 Sep 2021 12:23 PM IST
सार
विदेशों से मंगवाए जा रहे पौधों को ये आयातक एक निश्चित समय के लिए क्वारंटीन भी कर रहे हैं। इसके लिए बागवानी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक इनके फार्मों में निरीक्षण करने जा रहे हैं। यह निरीक्षण इसलिए जरूरी है कि विदेशों से इन पौधों के साथ कोई बीमारी या वायरस हिमाचल न पहुंच जाए।
विज्ञापन
सेब के पौधे(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश की 17 फर्में, बागवान व अन्य लोग अमेरिका, इटली आदि देशों से सीधे सेब और चेरी के पौधे मंगवा रहे हैं। राज्य सरकार के बागवानी विभाग ने इन्हें इसके लिए प्रमाणपत्र जारी किए हैं। इस संबंध में आरटीआई एक्ट के तहत जिला शिमला की तहसील रोहडू़ के गांव शील निवासी हरीश चौहान ने जानकारी मांगी तो उन्हें संयुक्त निदेशक बागवानी ने बताया कि विभाग ने अपने स्तर पर जो पौधे मंगवाए हैं, उसकी जानकारी उसके पास है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: हिमाचल में हादसा: गगरेट में तीन पुलिस कर्मियों की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत
विज्ञापन
जो पौधे अन्य आयातकों ने मंगवाए हैं, उसकी उनके पास कोई भी जानकारी नहीं है। क्या सभी आयातक प्लांट क्वारंटीन के मानकों का अनुपालन कर रहे हैं या नहीं, इस पर विभाग का कहना है कि यह काम बागवानी विश्वविद्यालय नौणी की ओर से किया जाता है। इसमें अपनी भूमिका होने से ही इंकार कर दिया है।
विज्ञापन
ये फर्में कर रही विदेशों से सेब और चेरी का आयात
बिलासपुर से सतीश कपिल, कोटखाई से मैसर्ज फ्यूचर फार्म्स, रोहडू़ से कृश जनार्था, चिड़गांव से लोकिंद्र सिंह, कसुम्पटी से डॉ. विनोद कुमार धवन, परिमहल शिमला से जय सिंह, परिमहल शिमला से नीलमणि, परिमहल शिमला से कमलेश पुरी, परिमहल शिमला से विक्रम भल्ला, नारकंडा से मैसर्ज फ्रूट केयर एग्रो, कांगड़ा के पालमपुर से नीवा प्लांटेशन, बिलासपुर के घुमारवीं से मैसर्ज रजत बायोटेक, कोटखाई से रवि चौहान, जुब्बल से मैसर्ज सैसराम्ता एंटरप्राइज, कोटगढ़ से पंकज कुमार, कुल्लू से छोबे राम और कुमारसैन से नरेंद्र कंवर।
कॉडलिंग मॉथ, फायर ब्लाइट जैसे रोगों के आने की आशंका
विदेशों से मंगवाए जा रहे पौधों को ये आयातक एक निश्चित समय के लिए क्वारंटीन भी कर रहे हैं। इसके लिए बागवानी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक इनके फार्मों में निरीक्षण करने जा रहे हैं। यह निरीक्षण इसलिए जरूरी है कि विदेशों से इन पौधों के साथ कोई बीमारी या वायरस हिमाचल न पहुंच जाए। विशेषकर कॉडलिंग मॉथ, फायर ब्लाइट जैसी बीमारियां हिमाचल पहुंच गई तो यह प्रदेश की सेब बागवानी को तबाह कर सकते हैं।