7479 बूथों पर एकसाथ सीएम के पुतले जलाना बना इतिहास: धूमल
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पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि प्रदेश के 7479 बूथों पर एकसाथ सीएम के पुतले जलाना इतिहास बन गया है। यह पहली बार हुआ है कि प्रदेश में सभी बूथों पर एकसाथ सीएम के पुतले जलाए गए हों। कहा कि गुड़िया मामले में भाजपा ने 26 जुलाई तक सीएम से त्यागपत्र मांगा था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
इसके विरोध में वीरवार को पूरे प्रदेश में सीएम के पुतले जलाए गए। धूमल नयनदेवी विस क्षेत्र के साईं ब्राह्मणा में शहीदों और किसानों की सम्मान में जय जवान, जय किसान कार्यक्रम के दौरान बोल रहे थे।
कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। कोटखाई प्रकरण में पहले सीएम की ओर से कुछ युवकों के फोटो फेसबुक पेज पर डालकर कहा गया कि आरोपी पकड़े गए।
कुछ ही देर में फोटो हटा दिए गए। उन्होंने सवाल किया कि आखिर सरकार किसे बचाने में लगी है? इसके अलावा मंडी में वनरक्षक होशियार सिंह मामले में भी सरकार आरोपियों को बचा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार शहीदों का अपमान कर रही है। विधायक के पैसा देने के बाद भी शहीदों के गांव में शहीद के नाम से गेट तक नहीं बन पाए।
भाजपाइयों ने फूंका प्रदेश भर में सीएम वीरभद्र का पुतला
गुड़िया प्रकरण के विरोध में वीरवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदेश भर में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पुतले फूंककर नाराजगी व्यक्त की। पार्टी के अध्यक्ष सतपाल सत्ती के आह्वान पर कार्यकर्ताओं ने सूबे के सभी बूथों पर पुतला दहन का कार्यक्रम किया। कार्यक्रम से पहले भाजपा ने मुख्यमंत्री को 26 जुलाई तक पद से इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था।
मुख्यमंत्री के इस्तीफा न देने पर प्रदेश में भाजपा ने हर बूथ पर मुख्यमंत्री का पुतला जलाया। अब 29 जुलाई को शिमला में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक होगी। इसमें मामले में अगला कदम उठाने के लिए रणनीति बनाने पर चर्चा होगी। बैठक में प्रदेश प्रभारी मंगल पांडेय के अलावा संगठन के राष्ट्रीय तथा राज्य के पदाधिकारी भी शामिल होंगे।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राजीव बिंदल ने कहा कि प्रदेश में बढ़ते अपराध और अपराधियों को संरक्षण देने की कांग्रेसी नीति पर मुख्यमंत्री से कड़ा कदम उठाने की उम्मीद थी, लेकिन मुख्यमंत्री का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार खुद ही सवालों के घेरे में आ गया था।
इसके चलते उन्हें 26 जुलाई तक पद से इस्तीफा देने की बात कही गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने लोगों की आवाज की ही तरह भाजपा की चेतावनी को भी अनसुना कर दिया। इसके बाद भाजपा ने इस मुद्दे को शहर गांव की हर गली तक पहुंचाने के लिए यह पुतला दहन कार्यक्रम किया।