फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal Pradesh Water Cess Act rejected in High Court, declared unconstitutional

Himachal News: हिमाचल सरकार का वाटर सेस एक्ट हाईकोर्ट ने किया खारिज, असांविधानिक करार दिया

Tue, 05 Mar 2024 09:50 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 05 Mar 2024 09:50 PM IST
सार

हाईकोर्ट के समक्ष भारत सरकार के उपक्रमों और निजी विद्युत कंपनियों ने वाटर सेस के खिलाफ अलग-अलग 40 के करीब याचिकाएं दायर की थीं। इन सभी याचिकाओें पर उच्च न्यायालय ने एक साथ सुनवाई करते हुए वाटर सेस को अवैध घोषित कर दिया।

विज्ञापन
Himachal Pradesh Water Cess Act rejected in High Court, declared unconstitutional
हिमाचल हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला देते हुए जलविद्युत परियोजनाओं पर राज्य सरकार की ओर से लगाए गए वाटर सेस एक्ट के प्रावधान की वैधता को असांविधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के समक्ष भारत सरकार के उपक्रमों और निजी विद्युत कंपनियों ने वाटर सेस के खिलाफ अलग-अलग 40 के करीब याचिकाएं दायर की थीं। इन सभी याचिकाओें पर उच्च न्यायालय ने एक साथ सुनवाई करते हुए वाटर सेस को अवैध घोषित कर दिया।

विज्ञापन


न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार वाटर सेस पर अलग से कानून नहीं बना सकती। यह मामला राज्य विधानसभा के क्षेत्राधिकार से बाहर का है। अदालत ने राज्य सरकार एवं प्रतिवादियों की ओर से हिमाचल प्रदेश जल विद्युत उत्पादन अधिनियम 2023 के तहत याचिकाकर्ताओं से वसूले गए जल उपकर को चार सप्ताह के भीतर लौटाने के आदेश दिए हैं।

विज्ञापन
Trending Videos

 प्रदेश की सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार ने वाटर सेस से अब तक 35 करोड़ रुपये वसूल लिए थे, जबकि सालाना 2,500 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था।
याचिकाकर्ताओं एनटीपीसी, बीबीएमबी, एनएचपीसी और एसजेवीएनएल और अन्य के अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष दलीलें दीं कि केंद्र और राज्य सरकार के साथ अनुबंध के आधार पर कंपनियां राज्य को 12 से 15 फीसदी बिजली मुफ्त देती हैं। इस स्थिति में हिमाचल प्रदेश जल विद्युत उत्पादन अधिनियम-2023 के तहत कंपनियों से वाटर सेस वसूलने का प्रावधान संविधान के अनुरूप नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि 25 अप्रैल, 2023 को भारत सरकार ने पाया कि कुछ राज्य भारत सरकार के उपक्रमों पर वाटर सेस वसूल रहे हैं।

विज्ञापन

भारत सरकार ने राज्य के सभी मुख्य सचिवों को हिदायत दी थी कि भारत सरकार के उपक्रमों से वाटर सेस न वसूला जाए। इसके बावजूद प्रदेश सरकार केंद्र के निर्देशों की अनुपालना नहीं कर रही है। राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे पेश हुए। वहीं, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में राज्य सरकार के महाधिवक्ता अनूप रतन ने अदालत को बताया कि जलविद्युत परियोजनाओं पर कर लगाना राज्य का विशेषाधिकार है। बता दें कि राज्य सरकार की ओर से जल विद्युत परियोजनाओं पर वाटर सेस लगाने का पंजाब और हरियाणा सरकार ने भी विरोध किया था। दोनों राज्यों का तर्क था कि वाटर सेस लगने से कंपनियां उन्हें महंगी बिजली बेचेंगी।

विज्ञापन

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पैरवी की
इस मामले में भारत सरकार और अन्य कंपनियों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अदालत में पैरवी की। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रजनीश मनीकटाला ने कहा कि भारतीय संविधान की धारा-246 के तहत कुछ मामलों पर भारत सरकार, कुछ पर राज्य विधानसभा और कुछ मामलों पर दोनों कानून बना सकते हैं।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed