खतरे में मासूमों की जान, विवि कब होगा मेहरबान
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के बच्चों के लिए गुणात्मक शिक्षा देने के लक्ष्य के साथ 1991 में शुरू हुआ विवि का मॉडल स्कूल सिर्फ नाम का मॉडल बनकर रह गया है। स्कूल की मौजूदा स्थिति किसी दूरदराज ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल से भी बदतर है। खस्ताहाल जर्जर भवन की दीवारें कभी भी मासूमों और शिक्षकों की जान पर भारी पड़ सकती है। मुख्याध्यापक और स्टाफ कार्यालय के साथ तीन कक्षाएं पुराने जर्जर भवन में चल रही हैं।
इस भवन की दीवारों से मिट्टी गिर रही है तथा दरारें देखकर हर कोई सहमत उठता है। बारिश होने पर अभिभावकों को अपने लाडलों की चिंता सताने लगती है। नए भवन को बनाने के लिए एक साल पूर्व स्कूल प्रशासन ने एक करोड़ रुपये जमा करवा दिए थे। निर्माण शाखा अब तक इसका नक्शा अप्रूव नहीं करवा पाई है। विवि के अधिकारियों और निर्माण शाखा की यह अनदेखी स्कूली बच्चों पर कहर बरपा सकती है।
स्कूल के पुराने भवन को गिराकर दूसरे फेज में भवन का निर्माण किया जाना है। इसमें कोई बड़ी अड़चन नहीं है। बावजूद इसके अब तक काम शुरू नहीं हुआ। स्कूल के इस भवन की हालत से नहीं लगता कि कभी विवि के कर्मचारी नेता जो यहां पढ़ने वाले मासूमों के अभिभावक हैं मासूमों की जान पर बने इस खतरे को लेकर गंभीर रहे हों। यदि ऐसा होता तो भवन आज तक बनकर तैयार हो जाता।
सिर्फ कार्यक्रमों में रिबन काटने आते है आलाधिकारी
विवि के इस मॉडल स्कूल में विश्वविद्यालय के आला अधिकारी स्कूल के कार्यक्रमों में रिबन काटने जरूर आते हैं लेकिन बच्चों पर मंडरा रहे इस खतरे को दूर करने की जहमत तक नहीं उठाते। हैरानी इस बात की है कि कुलपति स्कूल मैनेजमेंट के पैटर्न तो डीएस इसके चेयरमैन हैं। विवि ईसी में चुनकर गए गैर शिक्षक और शिक्षक संघ के प्रतिनिधि कमेटी के सदस्य हैं। लेकिन स्कूल भवन की हालत सुधारने को लेकर कोई गंभीर नजर नहीं आता।
यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल के मुख्याध्यापक उमेश मोदगिल ने माना कि कुछ कक्षाएं पुराने भवन में लगानी पड़ रही हैं। क्लास रूम की कमी के चलते चार सौ के करीब छात्रों को ही प्रवेश दिया जाता है। नए भवन के निर्माण को विवि की निर्माण शाखा में पैसा जमा करवा दिया है। नक्शा बनाने अप्रूव करवाने सहित निर्माण का कार्य शाखा को ही करवाना है। मामले को निर्माण शाखा और विवि प्रशासन से लगातार उठाया जाता रहा है।
एचपीयू की निर्माण शाखा के अधिशासी अभियंता संजय शर्मा ने माना कि नक्शा और डिजाइन अप्रूव करवाने में देरी हुई है। विवि प्रशासन से कुछ मंजूरी लेने की प्रक्रिया जारी है। प्राथमिकता के आधार पर भवन निर्माण करवाया जाएगा। दूसरे फेज का निर्माण जल्द से जल्द शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।