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सूचना आयोग: किस कानून में लेनी है सूचना, यह मांगने वाले की इच्छा
Mon, 18 Apr 2022 01:56 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 18 Apr 2022 01:56 PM IST
सार
अपीलकर्ता नरेश कुमार ने एसडीएम कार्यालय सोलन के अधीक्षक से सूचना मांगी थी। यह नहीं मिली तो उन्होंने यह अपील प्रथम अपीलीय अथॉरिटी यानी एसडीएम सोलन के आदेश के खिलाफ दायर की।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश सूचना आयोग ने एक अपील पर सुनाए फैसले में टिप्पणी की है कि यह सूचना मांगने वाले की इच्छा है कि वह इसे आरटीआई एक्ट में लेना चाहता है या फिर इंडियन एविडेंस एक्ट के कॉपिंग एजेंसी नियमों में लेना चाह रहा है। आयोग ने कहा कि दोनों ही कानून अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं। ऐसे में अगर किसी ने आरटीआई एक्ट में सूचना मांगी है तो इसे यह कहकर देने से इंकार नहीं किया जा सकता है कि वह इसे कॉपिंग एजेंसी रूल्स में लें। यह निर्णय राज्य मुख्य सूचना आयुक्त नरेंद्र चौहान ने सुनाया है।
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इस बारे में अपीलकर्ता नरेश कुमार ने एसडीएम कार्यालय सोलन के अधीक्षक से सूचना मांगी थी। यह नहीं मिली तो उन्होंने यह अपील प्रथम अपीलीय अथॉरिटी यानी एसडीएम सोलन के आदेश के खिलाफ दायर की। उन्होंने प्रथम अपील का निपटारा करते हुए कहा कि म्यूटेशन नंबर 91 के प्रमाणन से संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड रूम में उपलब्ध हो सकता है। वह इस दस्तावेज को इंडियन एविडेंस एक्ट के कॉपिंग एजेंसी नियमों के बजाय आरटीआई एक्ट में प्राप्त करें।
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इसके अलावा यह सूचना उस समय तक उपलब्ध नहीं करवाई जा सकती है, जब तक कि अपीलकर्ता फाइल संख्या की जानकारी नहीं दें। अपीलकर्ता ने 21 जून 2021 को एक आरटीआई की दरख्वास्त दायर की थी, जिसमें हिमाचल प्रदेश सीलिंग और भू नियंत्रण अधिनियम 1972 के तहत म्यूटेशन संख्या 89 और 91 से संबंधित सूचना मांगी गई थी। इसके लिए 26 अगस्त 1975 का एक निर्णय आधार बनाया गया।
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