हिमाचल को कैशलेस बनाने की पहल, डीसी बनाएंगे रोडमैप
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देश को पहली ई-विधानसभा देने वाले हिमाचल ने अब कैशलेस होने की पहल की है। रणनीति तैयार है और अब सूबे के सभी उपायुक्तों को इसे धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उपायुक्त कार्य नीति बनाकर अधिकारियों, कर्मचारियों और पब्लिक को डिजिटल लेनदेन की ट्रेनिंग दिलाएंगे। शिमला और मनाली पहले ही कैशलेस की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। दोनों ही शहरों में ऑनलाइन पेमेंट के साथ कैशलेस शॉपिंग की सुविधा शुरू हो गई है।
खुद कैशलेस होने के बाद राजभवन ने सूबे के तमाम विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को कैशलेस करने का अभियान छेड़ रखा है। डिजिटल भुगतान को लेकर सोमवार को प्रदेश सचिवालय में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की एक बैठक भी हुई। इस बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के संयुक्त सचिव इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी राजीव कुमार ने की। बैठक में तय हुआ कि संबंधित जिला और स्थानीय प्रशासन की सहायता से खंड स्तरीय कार्यशालाएं होंगी।
इनमें सभी हितधारकों को आमंत्रित कर उनकी ट्रेनिंग होगी। राजीव कुमार ने कहा कि भारत सरकार ने कैशलेस प्रणाली के लिए राज्यों को प्रशिक्षण लक्ष्य दिए हैं। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में बैंकों, सरकारी कर्मियों, पंचायतों, आंगनबाड़ी-आशा कार्यकर्ताओं, लोकमित्र केंद्र संचालकों, स्वयंसेवी संस्थाओं समेत सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों को शामिल करेंगे। उन्होंने राज्य सरकार से भी सभी लेनदेन को डिजिटल प्रणाली से करने का अनुरोध किया।
हिमाचल ने केंद्र से मांगी मदद
हिमाचल सरकार के सूचना प्रोद्यौगिकी विभाग के प्रधान सचिव जगदीश चंद्र शर्मा ने आश्वासन दिया कि राज्य में कैशलेस प्रणाली अपनाने को तेजी से जरूरी कदम उठाए जाएंगे। इसकेलिए केंद्र सरकार सहयोग करे।
सूचना प्रोद्यौगिकी निदेशक मानसी सहाय ठाकुर, एनआईसी के प्रतिनिधि अधिकारी अजय चहल, विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी, केंद्रीय संस्था सीएससी-एसपीवी और ट्रेनर संस्था नीलिट के प्रतिनिधि भी बैठक में उपस्थित थे।
दो गांवों के कैशलेस होने का दावा
केंद्रीय संस्था सीएससी-एसपीवी ने इस बैठक में हिमाचल के सोलन जिले का तुंदल और मंडी जिले के संधोल गांवों के कैशलेस होने का दावा किया। संस्था के प्रतिनिधि ने बताया कि भारत सरकार ने इन दो गांवों को पुरस्कार के लिए चुने जा रहे 50 गांवों में नामित किया है।
डिजिटल भुगतान के ये भी हैं तरीके
यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई), ई वॉलेट यानी ई बटुआ, आधार से जुड़ी भुगतान प्रणाली, यूएसएसआईडी आधारित मोबाइल बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड।
कैशलेस शहर की राह पर शिमला
देश में सबसे पहले ई विधानसभा बनने वाले राज्य हिमाचल की राजधानी शिमला कैशलेस शहर की राह पर है। ई-शिमला में स्कूल फीस से लेकर पानी-बिजली बिल और टैक्स ऑनलाइन जमा करवाने की सुविधा मौजूद है। शिमला शहर में स्थित अधिकांश सरकारी विभाग ऑनलाइन हो चुके हैं। इन विभागों से जुड़े लेनदेन के काम अब मोबाइल फोन के एक क्लिक से हो रहे हैं।
शहर के अधिकांश कारोबारियों ने भी नोटबंदी होने के बाद से ऑनलाइन कैश पेमेंट लेने के लिए स्वाइप मशीन को अपना लिया है। शिमला शहर में नगर निगम से जुड़े विभिन्न तरह के टैक्स और पानी बिल ऑनलाइन जमा करवाने की सुविधा है। बिजली बिल जमा करवाने के लिए लोगों को लाइनों में खड़े रहने की जरूरत भी नहीं है।
बिजली बोर्ड की वेबसाइट पर जाकर लोग बिजली बिल जमा करवा सकते हैं। निजी स्कूलों की फीस भी बैंकों में ऑनलाइन पेमेंट के जरिये जमा हो सकती है। इसके अलावा जीवन बीमा पॉलिसी, मोबाइल, लैंडलाइन फोन के बिल, मोबाइल, डिश टीवी रिचार्ज, गैस सिलेंडर की पेमेंट भी ऑनलाइन जमा करवाने की सुविधा यहां उपलब्ध है।
कैशलेस सोसायटी बनाना मुश्किल नहीं
माल रोड के साथ लोअर बाजार में स्थित दुकानों में अधिकांश कारोबारियों ने स्वाइप मशीनें लगा ली हैं। लोग इन दुकानों में जाकर की गई खरीदारी की पेमेंट भी प्लास्टिक मनी के जरिये कर सकते हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि प्रदेश की राजधानी शिमला कैशलेस सोसायटी की राह पर चल पड़ी है। उधर, प्रदेश के अन्य शहरों में भी अब तेजी से कैशलेस सोसायटी का ट्रेंड शुरू करने को सरकार ने पहल की है। नगर निकायों को ऑनलाइन करने के लिए अफसर लगातार प्रयासरत हैं।
कैशलेस सोसायटी बनाना इतना मुश्किल भी नहीं है, जितना माना जा रहा है। मोबाइल फोन से घर बैठे-बैठे कैशलेस सोसायटी के विकल्पों का इस्तेमाल कर भागदौड़ से बचा जा सकता है। डिजिटल लेनदेन के दौरान बस थोड़ी सतर्कता बरतने की जरूरत है। प्रत्येक लेनदेन के लिए एसएमएस के माध्यम से नियमित रुप से सूचना प्राप्ति के लिए अपना मोबाइल फोन नंबर बैंक अकाउंट के साथ पंजीकृत कराएं। किसी के साथ भी अपना पिन साझा न करें। केवल विश्वसनीय कारोबारियों के साथ लेनदेन करें।
कैशलेस सोसायटी बनाने के लिए सरकार ने दिए हैं कई विकल्प
कारोबारी स्वाइप मशीन का इस्तेमाल कर अपना कारोबार बढ़ा सकते हैं। दुकानों में मशीन लगाने के लिए कारोबारियों को बैंकों में संपर्क कर मशीन लेने के लिए आवेदन करना होगा। बीते तीन सप्ताह में बैंकों में स्वाइप मशीनें लगाने के लिए आवेदन करने वालों की संख्या बढ़ी है। -विवेक कौल, उपमहाप्रबंधक, यूको बैंक शिमला
स्वाइप मशीनें लगाने वाले कारोबारियों की शहर में संख्या बढ़ी है। केंद्र सरकार ने स्वाइप मशीनों के जरिये ली जाने वाली पेमेंट पर टैक्स माफ कर कारोबारियों को बड़ी राहत दी है। नए साल में भी यह छूट बरकरार रहनी चाहिए। -इंद्रजीत सिंह, अध्यक्ष व्यापार मंडल शिमला
बैंक फ्री में लगाते हैं स्वाइप मशीन
जिन कारोबारियों के बैंकों में करंट अकाउंट हैं। उन्हें बैंक बिना किसी शुल्क के स्वाइप मशीन लगाते हैं। बैंक डेबिट और क्रेडिट कार्ड से होने वाली पेमेंट का डेढ़ प्रतिशत कमीशन लेते हैं। इन दिनों केंद्र सरकार ने 30 दिसंबर तक डेबिट कार्ड से होने वाली पेमेंट का कमीशन माफ किया हुआ है।
डिजिटल भुगतान के यह भी हैं तरीके
यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई), ई वॉलेट यानी ई बटुआ, आधार से जुड़ी भुगतान प्रणाली, यूएसएसआईडी आधारित मोबाइल बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड।
होम डिलीवरी की सुविधा दे रहे कारोबारी
शहर के कुछ कारोबारियों ने ऑनलाइन पेमेंट के साथ ऑनलाइन शापिंग करने की सुविधा देना भी शुरू कर दिया है। दुकान की वेबसाइट बनाकर कारोबारी होम डिलिवरी की सुविधा भी दे रहे हैं।