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फेसबुक पर लड़की फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजे तो यह सेक्स पार्टनर की तलाश करना नहीं : हाईकोर्ट
Sun, 07 Feb 2021 12:02 PM IST
अरविन्द ठाकुर
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 07 Feb 2021 12:02 PM IST
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हाईकोर्ट- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि फेसबुक पर लड़की के फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने का मतलब यह नहीं है कि वह यौन संबंध बनाना चाहती है। यह कतई नहीं समझा जाना चाहिए कि फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर लड़की ने अपनी स्वतंत्रता और अधिकार को युवक के हवाले कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा है कि आजकल सोशल नेटवर्किंग पर रहना आम बात है।
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लोग मनोरंजन, नेटवर्किंग और जानकारी के लिए सोशल मीडिया साइट्स से जुड़ते हैं न कि इसलिए कि कोई जासूसी करे या यौन एवं मानसिक रूप से उत्पीड़न सहने के लिए। आजकल के अधिकतर युवा सोशल मीडिया पर हैं और सक्रिय भी हैं। ऐसे में उनके द्वारा फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना कोई असामान्य बात नहीं है। इसलिए यह मानना कि बच्चे अगर सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाते हैं तो वह सेक्स पार्टनर की तलाश में ऐसा करते हैं।
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जस्टिस अनूप चिटकारा ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। आरोपी युवक की दलील थी कि लड़की ने अपने सही नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी, इसलिए वह यह मानकर चल रहा था कि वह 18 वर्ष से अधिक की है और इसलिए उसने उसकी सहमति से यौन संबंध स्थापित किया, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि फेसबुक अकाउंट बनाने के लिए न्यूनतम उम्र 13 वर्ष है।
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कोर्ट ने यह भी कहा है कि यह असामान्य नहीं है कि लोग अपनी उम्र और पहचान के बारे में सब कुछ नहीं बताते, क्योंकि यह पब्लिक प्लेटफार्म है। कोर्ट ने कहा कि अगर बच्ची ने फेसबुक पर गलत उम्र दर्ज की हो तो उसे बिल्कुल सही नहीं समझना चाहिए।
ऐसे में यह मान कर नहीं चला जा सकता कि लड़की नाबालिग नहीं, बल्कि बालिग है।कोर्ट ने यह भी कहा कि जब आरोपी ने पीड़िता को देखा होगा तो यह उसकी समझ में आ गया होगा कि वह 18 वर्ष की नहीं है, क्योंकि पीड़िता की उम्र महज 13 वर्ष तीन महीने की थी। कोर्ट ने आरोपी के इस बचाव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि चूंकि लड़की नाबालिग थी तो उसकी सहमति कोई मायने नहीं रखती।