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पशुओं की टैगिंग और चिप लगाने की सरकारी योजनाएं फ्लॉप

Sat, 24 Nov 2018 12:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 24 Nov 2018 12:47 PM IST
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Himachal Pradesh govt Stray cattle tagging scheme fails to check stray animals

प्रदेश में लावारिस पशुओं की समस्या से निजात पाने के लिए सरकारी योजनाएं सिरे नहीं चढ़ रही हैं। सरकार ने पहले पशुओं की टैगिंग करने की योजना बनाई सरकार ने पंचायतों को पशुओं की टैगिंग करने के लिए कहा था, लेकिन यह योजना फ्लॉप हो गई। इसके बाद पशुओं की गर्दन के पास चिप लगाने की योजना पर काम किया गया। यह योजना भी हांफी गई।

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इसके बाद राज्य सरकार ने पशुओं के शरीर के अंदर चिप लगाने की योजना पर भी विचार किया। चिप लगाने से पशुओं के बारे में यह जानकारी मिलनी थी कि किस व्यक्ति के नाम से पशु पंजीकृत है। राज्य सरकार ने इस योजना पर पायलट प्रोजेक्ट कु ल्लू जिले में चलाया था। यह योजना भी सफल नहीं हो सकी। पशुओं के शरीर में चिप लगाना काफी महंगा पड़ता है।
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लावारिस पशुओं के लिए बनाई गई उप-समिति के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि पशुओं कानों में टैगिंग नसों में चिप लगाने की योजना सफल नहीं हुई थी। लावारिस पशुओं के शरीर में चिप लगाने की प्रक्रिया काफी महंगी पड़ती है। सरकार के पास आर्थिक संसाधन सीमित हैं और लावारिस पशुओं के शरीर पर चिप लगाना संभव नहीं है। 

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