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तीन साल हो गए, भ्रष्टाचार के बड़े आरोप अभी भी स्क्रूटिनी में

Sun, 27 Dec 2020 12:22 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 27 Dec 2020 12:22 PM IST
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Himachal Pradesh government three year celebration side story
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

जयराम सरकार के तीन साल बीत गए हैं, मगर भ्रष्टाचार के बड़े मुद्दे अभी भी स्क्रूटिनी में हैं। पूर्व मंत्रियों, बड़े नेताओं, आला अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए कथित गंभीर अनियमितताओं के मामलों की जांच पर सरकार आगे नहीं बढ़ी है। भाजपा ने सत्ता में आने से पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात की थी। राज्यपाल को सौंपी चार्जशीट में अली बाबा चालीस चोर जैसी कहावत जोड़कर खूब सुर्खी बटोरी थी।

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यह आरोप पत्र भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, मौजूदा सरकार के कुछ मंत्रियों और अन्य नेताओं ने राज्यपाल को दिसंबर 2016 में सौंपा था। यह भी एलान किया था कि भाजपा सत्ता में आएगी तो इस आरोप पत्र को छानबीन के लिए विजिलेंस ब्यूरो को देगी। तब वीरभद्र सरकार धर्मशाला में अपने कार्यकाल के पूरा होने के चार साल मना रही थी तो शिमला में राजभवन में भाजपा नेता अपना 75 पृष्ठों का आरोप पत्र राज्यपाल को सौंप रहे थे।
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इस आरोप पत्र में न केवल तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके परिवार को लपेटा गया था, बल्कि उनके एक मंत्री धनीराम शांडिल को छोड़कर सभी मंत्रियों पर कई गंभीर आरोप थे। इनमें वर्तमान में भाजपा के एक विधायक पर भी गड़बड़ियों के आरोप थे, जो उस वक्त कांग्रेस सरकार में मंत्री थे और यह बात अलग है कि बाद में भाजपा सरकार में भी मंत्री बने।
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उस समय वीरभद्र सिंह ने इन आरोपों की सत्यता को खारिज करते हुए कहा था कि ये गलत हैं और उन्होंने झूठे आरोप लगाने पर केस करने तक की भी चेतावनी दी थी। ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि सरकार क्या भाजपा चार्जशीट के आरोपों की सत्यता को स्थापित नहीं कर पाई है या फिर यह हिमाचल की जनता से किए भ्रष्टाचार के जीरो टॉलरेंस के वायदे को भूल रही है। 


क्या कहते हैं मुख्यमंत्री 
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि भ्रष्टाचार से सरकार का कोई समझौता नहीं है, मगर बदले की भावना से भी काम नहीं होगा। यह बात सत्ता में आते ही साफ कर दी गई थी। कैबिनेट का पहला फैसला राजनीति से प्रेरित नहीं था। विजिलेंस ब्यूरो चार्जशीट की स्क्रूटिनी कर रही है। कई गंभीर मामले भी हैं। केवल मामले बनाने के लिए काम नहीं होगा। जहां गड़बड़ी होगी, वहां कार्रवाई होगी।

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