हिमाचल में वनों से मिलेगा रोजगार और पैसा, सरकार ने बजट में किया ये प्रावधान
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हिमाचल प्रदेश के वन रोजगार और राजस्व का साधन बनेंगे। जयराम सरकार के पहले बजट में करीब तीन चौथाई वन क्षेत्र वाले हिमाचल प्रदेश के वनों को रोजगार और आय अर्जित करने का साधन बनाने की कोशिश की गई है। इसके लिए सरकार ने बजट में 651 करोड़ का प्रावधान किया है।
इसके तहत सरकार कैंपा फंड के जरिये अगले तीन साल में प्रदेशभर में 22 वन विहार/ईको पार्क स्थापित करेगी। वहीं, ईको पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आने वाले वित्तीय वर्ष में 25 नए इको पर्यटन स्थान आवंटित किए जाएंगे।
वनों से रोजगार पैदा करने के उद्देश्य से सरकार ने चीड़ की पत्तियों पर आधारित उद्योगों के लिए 50 प्रतिशत निवेश उपदान का एलान किया है। इससे न सिर्फ चीड़ की पत्तियों को इकट्ठा करने का रोजगार पैदा होगा, बल्कि उससे उत्पाद तैयार करने में मदद मिलेगी और जंगलों की आग पर काबू पाया जा सकेगा।
हाल में सुप्रीम कोर्ट ने तीन वन रेंजों में सिल्वीकल्चर तरीके से वन प्रबंधन करने की इजाजत दी है। इसी को देखते हुए सरकार ने वन उत्पादों व उखड़े पेड़ों को इकट्ठा करने और नीलामी के लिए नीति बनाने की भी घोषणा की है।
वन समृद्धि जन समृद्धि योजना के जरिये जड़ी बूटी इकट्ठा करने, प्रसंस्करण और विपणन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। निहत्थे वन कमियों को जल्द ही सरकार हथियार मुहैया कराएगी। बजट में ठोस एलान तो नहीं किया गया लेकिन आश्वासन दिया गया है कि यह प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है और जल्द ही इस पर निर्णय कर लिया जाएगा।
युवा मंडल और स्कूलों को पौधरोपण की जिम्मेदारी
अभी तक वन विभाग ही पौधरोपण की जिम्मेदारी निभा रहा था। लेकिन इस बार युवा, महिलाओं और विद्यार्थियों को इसमें सहभागी बनाने का प्रयास किया गया है। इसके लिए सामुदायिक वन संवर्धन योजना प्रस्तावित की गई है।
इस योजना के तहत युवक व महिला मंडलों को पौधरोपण के लिए भूखंड आवंटित किए जाएंगे। साथ ही स्कूलों को भी भूखंड आवंटित करने के लिए विद्यार्थी वन मित्र योजना शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत आवंटित भूखंड में स्कूली बच्चे पौधारोपण कर साल भर उनकी देखभाल भी करेंगे।
बाह्य सहायता प्राप्त योजनाओं के लिए 125 करोड़
आने वाले वित्तीय वर्ष में वन विभाग में तीन बाह्य सहायता प्राप्त योजनाएं लागू होने वाली हैं। इनमें जीआईसीए द्वारा वित्त पोषित 800 करोड़ की लागत वाली एचपी फॉरेस्ट ईको सिस्टम मैनेजमेंट एंड लाइवलीहुड इंप्रूवमेंट परियोजना के जरिये लोगों की आजीविका
आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, 665 करोड़ की लागत वाली विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित इंटीग्रेटेड डेवेलपमेंट प्रोजेक्ट फॉर सोर्स सस्टेनेबिलिटी एंड क्लाइमेट रीसाइलेंट रेनफेड एग्रीकल्चर के जरिये कृषि आय बढ़ाने के लिए जल स्रोतों को विकसित किया जाएगा।
वहीं, एचपी फॉरेस्ट फॉर प्रोस्पेरिटी के अंतर्गत ईंधन लकड़ी का पौधरोपण तथा वन उत्पादों से आय वृद्धि के स्रोत बढ़ाए जाएंगे। तीनों प्रोजेक्टों के लिए सरकार ने 125 करोड़ के बजट का प्रावधान किया है।