रिपोर्ट में खुलासा: हिमाचल में जन शिकायतों का बुरा हाल, 8,662 मामले लंबित; 97% शिकायतें 21 दिन से पुरानी
हिमाचल प्रदेश में जन शिकायतों के निपटारे को लेकर जारी सरकारी रिपोर्ट में चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। प्रदेश की 8,662 लंबित शिकायतों में से 8,382 मामले 21 दिन से अधिक पुराने हैं, यानी करीब 97 प्रतिशत शिकायतें तीन सप्ताह बाद भी लंबित हैं।
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हिमाचल प्रदेश में जन शिकायतों के समय पर निपटारे की स्थिति को लेकर सरकारी आंकड़ों में बड़ी चुनौती सामने आई है। प्रदेश में कुल 8,662 शिकायतें लंबित हैं। इनमें से 8,382 शिकायतें 21 दिन से अधिक समय से निपटारे की प्रतीक्षा कर रही हैं। इस तरह करीब 97 प्रतिशत लंबित शिकायतें तीन सप्ताह से ज्यादा पुरानी हैं। केंद्र सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की सितंबर 2026 की केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) की मासिक रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई है। मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, एक हजार से अधिक लंबित शिकायतों वाले 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हिमाचल प्रदेश 13वें स्थान पर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 तक हिमाचल प्रदेश में निपटारे के लिए कुल 10,559 शिकायतें उपलब्ध थीं। इनमें 3,732 नई शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि 6,827 मामले पिछली अवधि से लंबित थे। इन नौ महीनों के दौरान केवल 1,897 शिकायतों का निपटारा किया गया। इसके बाद प्रदेश में 8,662 शिकायतें लंबित रह गईं। उपलब्ध कुल शिकायतों में से करीब 18 प्रतिशत का ही निपटारा हो सका, जबकि लगभग 82 प्रतिशत शिकायतें लंबित रहीं। आंकड़े बताते हैं कि शिकायतों के निपटारे की गति बढ़ाना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। लंबित मामलों में बड़ी संख्या उन शिकायतों की है, जिन पर तीन सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी समाधान नहीं हुआ है।
21 दिन से अधिक समय से लंबित शिकायतों के मामले में महाराष्ट्र 31,532 शिकायतों के साथ पहले स्थान पर है। पश्चिम बंगाल 17,445 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बाद दिल्ली, बिहार, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब सहित अन्य राज्यों का स्थान है। रिपोर्ट में एक हजार से अधिक लंबित शिकायतों वाले 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की स्थिति का आकलन किया गया है। इस सूची में हिमाचल प्रदेश 13वें स्थान पर दर्ज है।
लोक शिकायत पोर्टल पर नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं से लेकर सरकारी सेवाओं में देरी तक से जुड़ी शिकायतें दर्ज की जाती हैं। इनमें बिजली-पानी की आपूर्ति, सड़क, राशन वितरण, सरकारी दस्तावेजों में देरी और अधिकारियों के दुर्व्यवहार से संबंधित मामले शामिल हैं। इसके अलावा पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ, छात्रवृत्ति, बैंकिंग, बीमा, दूरसंचार और डाक सेवाओं से जुड़ी शिकायतें भी पोर्टल पर दर्ज होती हैं। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन तथा पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से संबंधित शिकायतें भी इनमें शामिल हैं। इन शिकायतों का समय पर निपटारा नागरिकों को सरकारी सेवाएं उपलब्ध करवाने और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट में पड़ोसी राज्यों के निपटारे के आंकड़े भी सामने आए हैं। हरियाणा में 41,221, उत्तराखंड में 13,635 और पंजाब में 12,065 शिकायतों के निपटारे का आंकड़ा दर्ज किया गया है। इसके मुकाबले हिमाचल प्रदेश में जनवरी से सितंबर 2026 तक केवल 1,897 शिकायतों का निपटारा हुआ। इन आंकड़ों के बीच राज्यों की कुल शिकायतों की संख्या और उनकी श्रेणियों का अंतर भी ध्यान में रखना जरूरी है। फिर भी हिमाचल में लंबित शिकायतों की बड़ी संख्या प्रशासन के लिए समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने की जरूरत को रेखांकित करती है।
मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं शिकायतों का तत्परता से निपटारा करते हैं। उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम के माध्यम से भी लोगों तक पहुंच रही है। नरेश चौहान के अनुसार, लंबित मामलों के निपटारे के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएंगे। अब देखना होगा कि इन निर्देशों के बाद शिकायतों के निपटारे की गति में कितना सुधार आता है और लंबे समय से लंबित मामलों को कितनी जल्दी समाधान मिल पाता है।