हिमाचल: पुलिस कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा रद्द, एसआईटी गठित
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया कि हिमाचल पुलिस कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा रद्द कर दी गई है। इसी माह के अंत तक फिर से परीक्षा करवाई जाएगी।
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल की लिखित परीक्षा रद्द कर दी है। अमर उजाला में पेपर लीक होने के खुलासे के बाद मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को पत्रकारों से इसका एलान किया है। उन्होंने मामले की जांच के लिए सेंट्रल रेंज मंडी के पुलिस उप महानिरीक्षक मधु सूदन की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस मुख्यालय की ओर से इस महीने के अंत तक लिखित परीक्षा की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। जिला कांगड़ा के गगल पुलिस थाना में आईपीसी की धारा-420 और 120 बी के तहत पेपर लीक को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई है।
सीएम ने कहा कि परीक्षा करवाने में बदलाव करने की जरूरत नहीं है। इसे दूसरे एजेंसियों से कराए जाने पर कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि आरोपी हिमाचल प्रदेश में हो या बाहर, बख्शे नहीं जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा के पेपर लीक होने की जानकारी मिली थी। शक की कोई गुंजाइश न बचे, इसके चलते इस मामले में जांच के आदेश दिए गए थे। पेपर लीक होने के खुलासे के बाद जिला कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक को मामला दर्ज करने के निर्देश दिए गए। अब पूरे मामले की तह तक जाने के लिए एसआईटी गठित की गई है। यह टीम हर पहलु को बारीकी से जांचेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जो भी भर्तियां हो रही हैं उनमें पारदर्शिता बरती जा रही है।
पांच सदस्यीय एसआईटी करेगी जांच
सेंट्रल रेंज मंडी के पुलिस उप महानिरीक्षक मधु सूदन की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एसआईटी मामले की जांच करेगी। प्रथम आईआर वाहिनी के कमांडेंट विमुक्त रंजन, साइबर क्राइम पुलिस अधीक्षक रोहित मालपानी, कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक खुशहाल चंद शर्मा और क्राइम पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र कालिया सदस्य हैं।
दसवीं कक्षा में 50 फीसदी से कम, भर्ती परीक्षा में पाए 90 में से 70 अंक
5 अप्रैल को लिखित परीक्षा का परिणाम निकलने के बाद पास हुए अभ्यर्थियों को पुलिस ने दस्तावेजों की जांच के लिए प्रदेशभर में बुलाया। इसके बाद नियुक्ति होनी थी। दस्तावेजों की जांच के दौरान एसपी कांगड़ा खुशहाल चंद शर्मा को तीन युवाओं पर शक हुआ। तीनों युवाओं के 90 में से 70 अंक थे। लेकिन दसवीं की कक्षा में उनके अंक 50 फीसदी भी नहीं थे। एसपी ने तीनों युवाओं से अलग-अलग कड़ी पूछताछ की। पुलिस पूछताछ में तीनों युवा फंस गए और उन्होंने माना कि लिखित परीक्षा से पहले ही 6 से 8 लाख रुपये देकर उन्हें टाइप्ड प्रश्नों के उत्तर मिल गए थे। उन्हें उत्तर रटने को कहा गया था।
धर्मशाला में प्रश्नपत्र लीक मामले के बाद सोलन में भी जांच तेज
पुलिस कांस्टेबल भर्ती की परीक्षा के कांगड़ा में पेपर लीक होने के मामले के बाद अब जिला सोलन पुलिस ने भी जांच तेज कर दी है। पुलिस मामले में कोई कोताही न हो, इसके लिए दोबारा व्हाट्सएप पर नष्ट किए डाटा को फोरेंसिक लैब हैदराबाद या चंडीगढ़ भेजेगी। इससे पहले नष्ट हुए व्हाट्सएप डाटा को जांच टीम ने अपने स्तर पर रिकवर करने की कोशिश की, लेकिन यह पूरी से निकल नहीं पाया। जो डाटा सामने आया है, साइबर क्राइम की टीम ने उसका रिकॉर्ड तैयार कर लिया है। अप्रैल में लिखित परीक्षा पास करवाने के नाम पर पैसे मांगने के आरोप में पुलिस ने अर्की के पांच युवकों को गिरफ्तार किया था।
आरोप है कि ग्राउंड टेस्ट पास कर चुके कई अभ्यर्थियों से इन्होंने संपर्क किया। उनसे लिखित परीक्षा पास कराने के लिए व्हाट्सएप चैटिंग कर और कॉल के माध्यम से पैसे मांगे हैं। पूछताछ के बाद युवाओं को छोड़ दिया था। इनके मोबाइल जब्त कर लैब में पुराना डाटा रिकवर करने के लिए भेजा गया है। पुलिस को शक है कि इन युवाओं के तार किसी बड़े सरगना से जुड़े हो सकते हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि जिन अभ्यर्थियों से इन युवकों ने संपर्क किया है, वे परीक्षा में पास हुए हैं या नहीं, इन सभी विषयों का पता मोबाइल से नष्ट किए डाटा से मिलेगा। उधर, एसपी सोलन वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि पुलिस मोबाइल डाटा खंगाल रही है। युवकों को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है।