पेंशनरों का एलान: मांगें नहीं मानीं तो 19 नवंबर को विधानसभा घेराव, 12 से 17 तक जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन
पेंशनरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का एलान कर दिया है। 12 से 17 नवंबर तक प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 19 नवंबर को धर्मशाला के जोरावर स्टेडियम में विशाल रैली निकालकर विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
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हिमाचल प्रदेश के पेंशनरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का एलान कर दिया है। 12 से 17 नवंबर तक प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 19 नवंबर को धर्मशाला के जोरावर स्टेडियम में विशाल रैली निकालकर विधानसभा का घेराव किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से शिमला से जारी प्रेस ब्यान में बताया गया कि पेंशनरों ने सरकार से 11 नवंबर से पहले 17 सूत्रीय मांगपत्र पर फैसला लेने और संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाने की मांग की है। संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक हेम सिंह ठाकुर ने बताया कि पांच नवंबर को सुंदरनगर में आयोजित बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर मुख्य अतिथि और अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। 18 सितंबर को बिलासपुर में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक में आंदोलन का निर्णय लिया गया था। इसके तहत 12 से 17 नवंबर तक प्रतिदिन 11 पेंशनर धरने पर बैठेंगे, जबकि 45 से 50 अन्य पेंशनर समर्थन में मौजूद रहेंगे। धरने का समय सुबह 11 से दोपहर 3:30 बजे तक रहेगा।
आंदोलन को सफल बनाने के लिए समिति पिछले एक महीने से जिला मुख्यालयों, ब्लॉकों और गांवों में जनजागरण अभियान चला रही है। सुंदरनगर की बैठक के साथ अभियान का अंतिम चरण पूरा हुआ। इसमें प्रदेश के सभी जिलों के पेंशनरों से आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया गया। बैठक में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के 30 अक्तूबर 2026 को मधु देषटा बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार मामले में आए फैसले का स्वागत किया गया। समिति ने सरकार से इसे अक्षरश: लागू करने की मांग की। वक्ताओं ने सरकार की ओर से फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने पर विचार किए जाने की आशंका जताते हुए इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार को अनावश्यक खर्च रोककर पेंशनरों की देनदारियां चुकानी चाहिए।
अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री एक ओर नए जिले बनाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खजाना खाली होने की बात कही जा रही है। यह विरोधाभासी है। छठे वेतन आयोग की देनदारियां भी लंबे समय से लंबित हैं। प्रमुख मांगों में एक जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त प्रथम और द्वितीय श्रेणी कर्मचारियों को 50 प्रतिशत पेंशन एरियर, संशोधित ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और एक जनवरी 2016 से अब तक का वेतन एरियर देना शामिल है। इसके अलावा एचआरटीसी पेंशनरों को अन्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों के समान आठ प्रतिशत महंगाई राहत, छठे वेतन आयोग की 50 हजार रुपये की पहली किस्त, बिजली बोर्ड में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, शहरी निकाय पेंशनरों को एक जनवरी 2016 के आधार पर पेंशन और 18 कॉरपोरेट सेक्टरों के कर्मचारियों के लिए 1999 की अधिसूचना बहाल करने की मांग उठाई गई।
तीन फीसदी डीए के साथ पेंशनरों को मिलेगी पेंशन, आंदोलन टला
वहीं हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के पेंशनरों को तीन फीसदी महंगाई भत्ते (डीए) के साथ पेंशन जारी होगी। वहीं, निगम कर्मचारियों के वेतन जारी करने के आदेश भी प्रबंधन ने दे दिए हैं। प्रदेश सरकार ने एचआरटीसी पेंशनरों को तीन फीसदी डीए जारी करने के आदेश जारी किए हैं। एचआरटीसी पेंशनरों ने निगम मुख्यालय के बाहर आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया है। हालांकि, पेंशनर इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने शेष पांच फीसदी डीए भी कर्मचारियों और पेंशनरों को एक साथ जारी करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही चिकित्सा बिलों का भुगतान और जिन कर्मचारियों को पेंशन नहीं लगी है, उन्हें पेंशन जारी करने पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने 3 फीसदी डीए जारी करने की घोषणा की है। एचआरटीसी पेंशनर्ज एसोसिएशन के महासचिव राजेंद्र ठाकुर ने निगम प्रबंधन ने डीए के साथ पेंशन जारी करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि कहा कि 13 अक्तूबर को मांगपत्र सौंपकर तीन नवंबर से निगम मुख्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव करने का निर्णय लिया था। इस बीच दो नवंबर को निगम के नए प्रबंध निदेशक ने पदभार संभालने के बाद जेएसी पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने पेंशनरों की मांगों को परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और वित्त विभाग के प्रधान सचिव के समक्ष उठाने के लिए दो दिन का समय मांगा था। प्रबंधन ने तीन फीसदी डीए पेंशन के साथ मिलने की बात कही।