कटाई का सीजन शुरू: रूस-यूक्रेन युद्ध से बढ़ने लगी गेहूं की मांग
ऊना जिला में अभी गेहूं की कटाई प्रारंभिक चरण में है और व्यापारी दो हजार क्विंटल गेहूं किसानों से खरीद भी चुके हैं। वहीं, सरकारी मंडियों में तीन दिनों में एक किसान ने 21 क्विंटल गेहूं ही बेची है।
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प्रदेश भर में इस समय गेहूं की कटाई का सीजन शुरू हो चुका है। दुनिया में गेहूं के सबसे बड़े निर्यातक रूस-यूक्रेन में छिड़े युद्ध के कारण इस बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की मांग पहले के मुकाबले अधिक है। हाल ही में भारत ने मिस्त्र को करीब 12 लाख मीट्रिक टन गेहूं निर्यात करने का सौदा किया है। व्यापारी फसल की कटाई होते ही किसानों के पास पहुंच रहे हैं और 2050 रुपये प्रति क्विंटल तक किसानों को दे रहे हैं। वहीं सरकार ने भी इस बार 45 रुपये तक गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाया है और मंडियों में प्रति क्विंटल 2015 रुपये दिए जा रहे हैं।
किसान भी गेहूं के अधिक भाव मिलने से गदगद हैं। संभावना यह भी जताई जा रही है आने वाले दिनों में गेहूं के दाम और बढ़ सकते हैं। रूस और यूक्रेन एशिया और अफ्रीका महाद्वीप के कई देशों में गेहूं के मुख्य निर्यातक हैं, लेकिन इस बार दोनों देशों में छिड़े युद्ध के कारण यूक्रेन में तो गेहूं की फसल पूरी तक बर्बाद हो गई और रूस के लिए भी युद्ध के हालातों में गेहूं का निर्यात करना संभव नहीं है। ऐसे में कई देश अब गेहूं की मांग को लेकर भारत का रुख कर रहे हैं।
व्यापारियों को फसल बेच रहे किसान
ऊना जिला में अभी गेहूं की कटाई प्रारंभिक चरण में है और व्यापारी दो हजार क्विंटल गेहूं किसानों से खरीद भी चुके हैं। वहीं, सरकारी मंडियों में तीन दिनों में एक किसान ने 21 क्विंटल गेहूं ही बेची है। किसान अधिक दाम मिलने पर व्यापारियों को गेहूं बेचना फायदे का सौदा मान रहे हैं। सूत्रों के अनुसार निकट भविष्य में गेहूं के दाम 300 से 400 रुपये तक और बढ़ सकते हैं।
जिला कृषि उत्पाद बाजार समिति के सचिव भूपेंद्र ठाकुर ने बताया कि अभी ज्यादातर क्षेत्रों कटाई शुरू नहीं हुई है, लेकिन व्यापारी किसानों से अधिक दाम पर गेहूं का सौदा अभी से करने लगे हैं। सरकारी मंडियों के मुकाबले बेहतर दाम मिलने के कारण किसान व्यापारियों को ही फसल बेच रहे हैं। सरकारी मंडियां गेहूं खरीद के लिए पूरी तरह तैयार हैं और इच्छुक किसान आनलाइन बुकिंग के बाद यहां आसानी से फसल बेच सकते हैं।