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बिना पीएचडी तीन कुलपति निजी विवि में लगे थे प्रोफेसर, जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा
Mon, 21 Dec 2020 11:55 AM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 21 Dec 2020 11:55 AM IST
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निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल सेवानिवृत्त अतुल कौशिक
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश में स्थित तीन निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति बिना पीएचडी किए प्रोफेसर नियुक्त हुए थे। प्रोफेसर पद पर सेवाएं देते हुए इन्होंने पीएचडी की। राज्य निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। चार कुलपतियों के पास बतौर प्रोफेसर दस साल सेवाओं का अनुभव नहीं था।
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दो कुलपतियों की 70 वर्ष से अधिक आयु थी। एक कुलपति के पास इस पद पर नियुक्त होने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता नहीं थी। आयोग की जांच कमेटी ने इन दस कुलपतियों को अयोग्य करार दिया है।
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आयोग की ओर से हायर एजूकेशन काउंसिल के अध्यक्ष प्रो. सुनील गुप्ता की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है। एक निजी विश्वविद्यालय के कुलपति अस्सी वर्ष की आयु के बावजूद बतौर कुलपति सेवाएं दे रहे हैं। एक कुलपति की आयु 70 वर्ष छह माह है। यूजीसी के नियमों के अनुसार कुलपति पद पर 70 वर्ष से अधिक आयु का व्यक्ति नियुक्त नहीं हो सकता है।
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जांच रिपोर्ट के अनुसार तीन कुलपति जब संबंधित विश्वविद्यालयों में बतौर प्रवक्ता नियुक्त हुए थे तो इन्होंने पीएचडी नहीं की थी। प्रोफेसर नियुक्त होने के लिए पीएचडी को अनिवार्य माना गया है। आरोप है कि इन्होंने प्रोफेसर के पद पर सेवाएं देते हुए पीएचडी की। ऐसे में इनकी नियुक्ति संदेह के घेरे में है। चार कुलपतियों ने प्रोफेसर की नियुक्ति के समय पीएचडी तो की थी, लेकिन इनके पास बतौर प्रोफेसर दस साल सेवाएं देने का अनुभव नहीं था। ऐसे में यह चार कुलपति भी अयोग्य करार दिए गए हैं।
निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल सेवानिवृत्त अतुल कौशिक ने बताया कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए निजी विश्वविद्यालयों की जांच की गई है। कुछ कुलपतियों ने मामले पर दोबारा विचार करने को कहा है। अगले सप्ताह इनके आवेदनों पर विचार किया जाएगा।