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Himachal Pradesh: न टूटने वाले अंडे के रहस्य में उलझे रहे लोग, वह निकले 'भगवान विष्णु'
Sun, 24 Jul 2022 09:00 PM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोहर (मंडी)
संवाद न्यूज एजेंसी, गोहर (मंडी)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 24 Jul 2022 09:00 PM IST
सार
शालीग्राम नदी से निकलने वाला एक पत्थर है। इसे हिंदू धर्म में विष्णु का स्वरूप माना जाता है। लोग इसे घर में रखते हैं। शुभ कार्यों में इसकी पूजा की जाती है।
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शालीग्राम की पिंडी।
- फोटो : संवाद
विस्तार
जमीन पर पटकने और पत्थर से वार कर भी न टूटने वाले जिस अंडे के रहस्य को लेकर लोग दिन भर उलझे रहे, वह अंडा नहीं पूजा में प्रयोग होने वाला शालीग्राम निकला। यह अंडा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। सच्चाई सामने आई तो सब दंग रह गए।
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हुआ यूं कि सलोई निवासी महेंद्र कुमार को पेड़ पर कुछ दिन पहले अंडे जैसी चीज मिली। इस खास पत्थर को अंडा समझकर तोड़ना चाहा, लेकिन टूटा नहीं। वह अंडे को खेत से घर ले गए। मिट्टी से खराब अंडे को पानी से साफ किया तो उसका पूरा आकार मुर्गी के अंडे जैसा था। वह आम अंडे से थोड़ा छोटा और वजन में 86 ग्राम निकला।
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इसकी सूचना वेटरनेरी विभाग गोहर को दी गई। अंडे को लेकर स्वयं उप मंडलीय पशु चिकित्सालय गोहर गए। डॉ. किशोर ने जांच कर बताया कि यह अंडा किसी बड़े पक्षी का हो सकता है। अंडे को तेज रोशनी में जब जांचा गया तो उसमें से रोशनी क्रॉस होने से इसे जांच के लिए वाइल्ड लाइफ सेंचुरी भेजा गया।
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जब बात चैलचौक के भद्रोंन निवासी प्रीतम तक पहुंची तो उन्होंने बताया कि यह अंडा नहीं, बल्कि उन्होंने शालीग्राम बनाया है। उन्होंने बताया कि उनके घर की तुलसी के पास से कोई पक्षी इसे उठाकर ले गया और पेड़ पर छोड़ दिया। इस तरह अंडे के रहस्य से पर्दा उठ गया।
क्या है शालीग्राम
शालीग्राम नदी से निकलने वाला एक पत्थर है। इसे हिंदू धर्म में विष्णु का स्वरूप माना जाता है। लोग इसे घर में रखते हैं। शुभ कार्यों में इसकी पूजा की जाती है।