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बिलासपुर की करलोटी ग्राम सेवा सहकारी सभा में आठ करोड़ रुपये का घोटाला

Thu, 05 Nov 2020 10:43 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 05 Nov 2020 10:43 AM IST
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Himachal News: Scam of Eight Crore Rupee in The karloti gram seva sahkari sabha in Bilaspur
फाइल फोटो

बिलासपुर की दी तलाई ग्राम सहकारी सभा के बाद अब पपलाह की दी करलोटी ग्राम सेवा सहकारी सभा सीमित में आठ करोड़ का घोटाला सामने आया है। विजिलेंस ब्यूरो को प्रारंभिक जांच में कई अहम सबूत हाथ लगे हैं। मुख्य आरोपी तत्कालीन सचिव की 2018 में मौत हो चुकी है। ब्यूरो ने तत्कालीन सचिव की पत्नी, सभा के सहायक सचिव व दो पूर्व ऑडिटर समेत कुल चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

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ब्यूरो को मुख्यमंत्री सेवा संकल्प के जरिये मिली शिकायत में सभा में वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे। प्रारंभिक जांच और पूर्व ऑडिटर देवराज डोगरा से साल 2016-17 और 2017-18 का एक साथ ऑडिट कराया तो घपले की जानकारी मिली। इसके बाद पता चला कि तत्कालीन सचिव शशि कुमार ने राज्य सहकारी बैंक शाखा गुग्गा मोहड़ा की 18 फर्जी एफडीआर बनाई और बिना प्रस्ताव बनाए उनकी अलग-अलग तिथियों में सभा के इंद्राज में एंट्री कर दी। 
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पहली फर्जी एफडीआर 25 मई 2009 की थी। अंतिम जाली एफडीआर 20 अप्रैल, 2015 को दाखिल की गई। इन एफडीआर की परिपक्वता दर्शाकर पांच करोड़ 32 लाख से ज्यादा का गबन कर दिया। शशि ने बिना किसी नियम या प्रक्रिया को अपनाए सभा से लोन अगेंस्ट डिपॉजिट दर्शाकर चालीस लाख अपनी पत्नी रीता देवी के खाते में जमा करा दिए।
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कई बार पत्नी रीता देवी के खाते में भारी रकम जमा हुई। इस काम में सहायक सचिव सुनील कुमार की भी भूमिका संदेह के घेरे में पाई गई। जांच में पता चला कि दी तलाई ग्राम सेवा सहकारी सभा सीमित से भी शशि ने सुनील कुमार के साथ मिलकर तीन एफडीआर परिपक्व होने पर 51.11 लाख लाने और अपनी सभा के दस्तावेजों में एंट्री करने के बाद उसे राज्य सहकारी बैंक की शाखा गुग्गा मोहड़ा में साठ लाख की एफडीआर कराना दर्शाया गया।


ये एफडीआर भी फर्जी निकलीं। 13 अगस्त, 2018 को शशि की मौत के बाद भी फर्जीवाड़े को अंजाम देकर और राशि का भी हेरफेर किया गया है। इस फर्जीवाड़े को रोकने का जिम्मा जिन ऑडिटर धर्मपाल, देवराज डोगरा और शादी लाल पर था, वो भी इसे किसी भी ऑडिट में नहीं पकड़ सके। ऐसे में उनकी भूमिका भी संदेह के दायरे में आ गई।

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