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महज पांच फीसदी कोरोना संक्रमितों को अस्पताल में इलाज की जरूरत
Sun, 02 May 2021 06:54 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 02 May 2021 06:54 PM IST
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कोरोना वायरस-सांकेतिक
- फोटो : PIB
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दिवाली के दो दिन बाद जिला कांगड़ा के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विक्रम कटोच कोरोना संक्रमित हो गए थे। घर में छोटे बच्चे और बुजुर्ग माता होने के बावजूद उन्होंने अस्पताल में भर्ती होने के बजाय होम आइसोलेशन को चुना। डॉ. विक्रम ने बिना किसी घबराहट के होम आइसोलेशन की व्यवस्था का जिम्मेदारी के साथ पालन किया और 18वें दिन दफ्तर पहुंचकर अपनी जिम्मेदारियों को संभाल लिया।
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डॉ. विक्रम कटोच ने बताया कि बेशक कोरोना महामारी देश के समक्ष आज एक बड़ी चुनौती बन चुकी है, लेकिन यदि हर नागरिक सरकार के दिशा-निर्देशों का सही ढंग से पालन करे तो इससे डरने की कोई जरूरत नहीं है। कोरोना संक्रमित होने वाले 85 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनमें कोई गंभीर लक्षण नहीं दिखते। बाकी बचे 15 फीसदी लोगों को अस्पताल में इलाज के लिए जाने की जरूरत है। इनमें तीन फीसदी मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें आईसीयू या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है।
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लोगों को समझना चाहिए कि कोरोना होने पर अस्पताल में दाखिल होना आवश्यक नहीं है। जरूरत होने पर ही अस्पताल जाएं। अन्यथा, होम आइसोलेशन में रहकर उपचार लें। होम आइसोलेशन के दौरान भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हर सुविधा मुहैया करवा रहा है। अगर लापरवाह रवैया रहा तो कोरोना किसी को नहीं बख्शता। ऐसे में समय-समय पर जारी सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करें। जरूरी हो तभी घर से निकलें। सैर-सपाटे के लिए घर से न निकलें तो बेहतर है। खानपान का विशेष ध्यान रखें।
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