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उत्तर से दक्षिण तक फैले एजेंटों के संपर्क तोड़ने में जुटी एसआईटी
Sat, 19 Dec 2020 12:30 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 19 Dec 2020 12:30 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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मानव भारती फर्जी डिग्री मामले की जांच कर रही एसआईटी अब विवि के मालिक और मुख्य आरोपी राज कुमार राणा और उनके करीबियों समेत 23 को दबोचने के बाद अब उसके उत्तर से दक्षिण के राज्यों तक फैले एजेंटों के आपसी संपर्क को तोड़ने में जुट गई है। अब तक की जांच में अधिकारियों को यह पता चला है कि दिल्ली से लेकर विभिन्न राज्यों में एजेंटों का जाल बिछा है। हर राज्य के एक या दो एजेंट विवि के संपर्क में रहते थे।
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जबकि बाकी एजेंट मुख्य एजेंटों के जरिये ही फर्जी डिग्री के खरीदार तलाश कर लाते थे। इस रैकेट की जानकारी मिलने के बाद से ही एसआईटी की कई टीमें लगातार जम्मू-कश्मीर से लेकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पूर्वी और पश्चिमी यूपी के अलग अलग शहरों तक दबिश दे रही है। इसी कड़ी में एसआईटी को पहली कामयाबी जम्मू से पकड़े गए मनु सिंह के रूप में मिली है।
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मनु जम्मू से एजेंटों का एक रैकेट संचालित करता था, जो उसे फर्जी डिग्री खरीदने के लिए कथित तौर पर ग्राहक लाते थे। सोलन की स्थानीय अदालत ने एसआईटी को मनु की सात दिन की पुलिस रिमांड दी है। अब इन सात दिनों में मनु से पूछताछ कर जांच अधिकारी उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास करेंगे जो या तो इसके पास ग्राहक लाए हैं या फिर जिन्होंने इसके जरिये फर्जी डिग्रियां हासिल की।
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इसके अलावा इससे पैसों के लेन देन के तरीकों को भी समझा जाएगा ताकि पैसे की ट्रेड को स्थापित कर राणा और विश्वविद्यालय के अन्य पदाधिकारियों पर लगे आरोपों को और पक्का किया जा सके। एसआईटी प्रमुख और एडीजी सीआईडी एन. वेणुगोपाल ने बताया कि कई टीमें विभिन्न राज्यों में दबिश दे रही हैं।
बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों ने डिग्रियां हासिल की हैं। ऐसे में उनमें से कितनों ने पैसे देकर हासिल की इसकी पड़ताल करना लंबा काम है। यही वजह है कि जांच और फिर उनसे मिली जानकारी के आधार पर गिरफ्तारियों में समय लग रहा है।