अध्यक्ष पद के साथ विवादों की रेस में शामिल हुईं इंदु गोस्वामी
- पहले सोशल मीडिया पर समर्थकों से बोलीं- नहीं दिया कोई बयान, फिर आज प्रेस को बयान जारी कर कहा मेरी मंशा ये नहीं थी
- अब सोशल मीडिया पर समर्थकों को कहा नहीं दिया मैंने कोई बयान, अमर उजाला के पास बयान का है साक्ष्य
विस्तार
भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष बनने की रेस में शामिल रही इंदु गोस्वामी अब विवादों की रेस में भी शामिल हो गई हैं। अमर उजाला में 'इंदु बोलीं- संगठन महामंत्री राणा बताएंगे किसने उछाला मेरा नाम' शीर्षक से खबर छपने के बाद पार्टी के भीतर खड़े हुए बवाल के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट डालते हुए समर्थकों से कहा है कि उन्होंने किसी तरह का कोई बयान नहीं दिया है।
वहीं, इसके बाद अमर उजाला को रविवार को भेजे बयान में उन्होंने कहा है कि उनकी मंशा ये नहीं थी जिस तरह से खबर लिखी गई है। खास बात यह है कि इससे पहले तक वह अमर उजाला से किसी तरह की बातचीत से हीं इंकार कर रही थी। लेकिन जब अमर उजाला ने बातचीत के साक्ष्य होने की बात कही तो वह अपनी ही बात से पलट गईं हैं और अब किसी और संदर्भ में बयान देने की बात कह रही हैं।
दरअसल, डॉ. राजीव बिंदल के इस्तीफे के बाद से खाली चल रहे प्रदेश अध्यक्ष के पद के लिए इंदु गोस्वामी समेत कई नेताओं का नाम चर्चा में है। हाल ही में राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के ट्विटर हैंडल से उनके नाम की घोषणा के साथ ही नियुक्ति की बधाई दे दी गई। इसके बाद सोशल मीडिया में भी बधाइयों का सिलसिला चल पड़ा।
चूंकि आधिकारिक तौर पर नियुक्ति के आदेश जारी नहीं हुए थे। ऐसे में विजयवर्गीय ने फिर ट्वीट कर नियुक्ति की गलत खबर पर सफाई पेश करते हुए गलती मानी और पिछला ट्वीट डिलीट कर दिया। इस घटनाक्रम पर शनिवार को अमर उजाला ने इंदु गोस्वामी से फोन पर बात कर उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में आपको संगठन से पूछना चाहिए। मैं इस विषय पर कुछ नहीं बोलना चाहती हूं।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने खुद कहा कि इस संबंध में पवन राणा जी से पूछो, उनसे पूछो। अमर उजाला ने उनके इस बयान के आधार पर खबर प्रकाशित कर दी। खबर छपने के बाद पार्टी के अंदर ही सियासी भूचाल मच गया। दरअसल, पवन राणा को लेकर कुछ दिन पूर्व विधायक व कुछ नेता मुखर हुए थे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को यह विवाद सुलझाना पड़ा। अब राणा पर ही बयान देने पर विवाद बढ़ा तो इंदु अपने बयान से पलट गईं।